नतीजे आने के बाद क्या पक्ष और विपक्ष दोनों खुश हैं।

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प्रदीप कुमार नायक
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
4 जून ने 400 का पोस्टमार्टम करके बीजेपी को 240 और एनडीए को 292 सीट पकड़ा दी। चूँकि प्रीपोल गठबंधन है तो पीएम के चेहरे पर वोट मिला है किंतु…किंतु बीजेपी की सीट की कमी भी इसी में गिनी जाएगी। अब इसमें में दर्जनों कारण गिन लें। वे नगण्य है। क्योंकि जीत सदैव हाहाकारी होती है जो किसी भी कमी को उभरने का मौक़ा नहीं देती है या कहे कोई देखना भी नहीं चाहता है। जबकि पराजय शांत भाव में हिला देती है जब मनुष्य के सोचने-समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है और सामने सिर्फ हार के कारण दिखाई देते है। जिन्हें जीत के वक्त दरवाजे से उल्टे पैर लौटा दिया कि खुशी के मौके पर मनहूसियत नहीं चाहिए। तिस पर यही असल भाव रहते है जो भविष्य को सँभालने में सहायता करते है।
अब तो कोई ऑप्शन ही नहीं है, आगे को सुधारने में इन कारणों को बैठाया जाएगा।एनडीए गठबंधन चुनाव पूर्व बन चुका था तो जीत एनडीए और उसके नेतृत्व की हुई है। लेकिन, इसका सम्मान गठबंधन साथी करेंगे, महत्वपूर्ण प्रश्न है।
टीडीपी और जदयू दोनों एनडीए को छोड़ती पकड़ती रही है। 2014 में टीडीपी ने एनडीए के साथ केंद्र और राज्य के चुनाव लड़े, सफलता प्राप्त की। 2019 से पहले एनडीए छोड़ दिया और लुढ़क गए, पुनः 2024 में आये और 2014 दोहरा दिया बल्कि जोरदार मेंडेट मिला। पवन कल्याण को भी दिली शांति मिली होगी। जन सेना से दो सांसद और 22 विधायक सरकार में भागीदार होंगे। ऐसे में टीडीपी महत्वाकांक्षा की ओट में एनडीए को छोड़ भी सकती है तो वही, जदयू दो बार ऐसा कर चुकी है। राजनीति में सबकुछ जायज है। गठबंधन का शेप कैसा होगा।मंत्रिमंडल में रेश्यो और पोर्टफोलियो किस प्रकार डील में आएँगे।क्योंकि विपक्ष पुरज़ोर कोशिश में है टीडीपी और जदयू से संपर्क में है। जेडीएस को भी ऑफर देंगे, कांग्रेस के नेचर में है। प्रीपोल एलायंस महाराष्ट्र में तोड़ चुके है।
वैसे विपक्ष को शांति से बैठकर सोचना चाहिए, लोकतंत्र ख़तरे से बाहर है या अब भी ख़तरे में है। चुनाव आयोग और ईवीएम निष्पक्ष है या हैक है। 3.0 भारत सरकार ने अपने कार्यकाल में क़ानून बनाना चाहिए, चुनाव पूर्व गठबंधन भी दल-बदल के तहत आएँगे। क्योंकि त्रिशंकु मेंडेट में सरकारें गिराने-बनाने के खूब खेल खेले गये है।
महाराष्ट्र में पहले विपक्ष ने एनडीए को तोड़ा था फिर एनडीए ने महाविकास को तोड़ कर रख दिया। ऐसा खेल खत्म होना चाहिए। अटल सरकार इसके फेर में फँसी थी और उससे पहले भी तोड़ना-जोड़ना हो रहा था।
ऐसा नहीं होगा तो एनडीए, इंडी सरकार बनाएँगे और गिराएँगे। देश फिर लोकसभा मुहाने पर खड़ा होगा। जनता जिसे चाहे उसने पूर्ण बहुमत देना चाहिए, ऐसे नंबर्स से कोई फ़ायदा नहीं है।बहुतेरे है, जो कह रहे है। सबक़ सिखा दिया। इससे क्या होगा, वे लोग कभी सबक शब्द जुबान पर नहीं लाते है एकमुश्त वोट देते है ताकि सत्तापक्ष को हटा दें।
इधर, सत्ताधारी दल को भी सत्ता की हनक में अपने कोर वोटर्स को इग्नोर नहीं करना चाहिए, डंके की चोट पर एड्रेस में लेना चाहिए। जिस प्रकार खुलेआम विपक्ष लेता है और लामबंद करता है। कृपया नोबेल की आस छोड़ दें।कभी न मिलना है, परिस्थियाँ आत्मनिर्भर से दूसरे पर निर्भर वाली हो चली है l
संघ और भाजपा का चोली दामन का साथ रहा है। माना जाता रहा है कि भाजपा की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने मे भी संघ की भूमिका होती है। लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव में लगता है की दोनों दूर दूर रहे।
सब मिल गए बावजूद इसके 50-60 सीट से ज्यादा नहीं घटा पाए मोदीजी की, लेकिन नैरेटिव ये है कि देश ने मोदी को नकार दिया है। ओडिशा में ऐतिहासिक जीत है, आंध्र में सरकार बन रही है, एमपी-दिल्ली-गुजरात में क्लीन स्वीप है, दक्षिण और ओडिशा में सीटें जबरदस्त बढ़ी हैं, सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बीजेपी है लेकिन नैरेटिव ये सेट किया जा रहा है कि मोदी को हरा दिया। मोदी को कमजोर कर दिया। खुद की सरकार बने या ना बने, मोदी को कमजोर कर दिया है इसी में खुश हैं। अरे बॉस, कमजोर कोई हुआ है इस मैंडेट से तो वो है देश। भारत इकलौता ऐसा देश होगा जो 8% की विकास दर से बढ़ने के बावजूद आज टाइम मशीन में बैठकर 90 के दशक में वापस जाना चाहता है । जहां इससे पूछो, उससे समझो (समझौते वाली) सरकारें चला करती थीं।
शायद देश को यही मंजूर है l
परंतु निश्चित रूप से तीसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में फिर से 5 वर्ष का कार्यकाल प्रारंभ करने जा रहे हैं, 1962 के बाद आप देश के पहले प्रधानमंत्री है जो लगातार 3 वर्ष का कार्यकाल प्रधानमंत्री के रूप में करने जा रहे हैं l
आज खुशी का माहौल है आज सभी दल इस देश में खुश हैं l NDA खुश है कि उसने 272 पार कर लिया है ।इण्डिया गठबंधन खुश है कि उसने बीजेपी को अकेले 272 न लाने दिया। 16 से 12 पर आने के बाद भी नीतीश खुश हैं कि वो गेमचेंजर हैं।चंद्रबाबू नायडू भी खुश हैं कि वो 3 से 13 पर आ गए।सपा खुश है कि वो पिछले 4 चुनावों (2014, 2017, 2019, 2022) बाद यूपी में नंबर 1 की पार्टी बनी। कांग्रेस भी खुश है कि अमेठी, रायबरेली से आगे बढ़ी। और डूबती नया वापसी होने लगी lजीतन राम मांझी भी खुश है कि अपना सीट जीत लिया अब गृहमंत्री पद पर दावा ठोकेंगेl EVM खुश है, कि उस पर कोई दाग, धब्बा नहीं लगा। बदनाम होने से बच गया lआज का चुनाव परिणाम से कुल मिला कर क्या सब खुश हैं ?

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