बिहार के दरभंगा महाराज के अंतिम महारानी के अंतिम काल मे परिजन आपस मे भिड़े!

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जैसे आम इंसान के साथ होता है वैसा हि महारानी के साथ अंतिम संस्कार हुआ!

जब तक शरीर मे काया है तब तक मूल्य है, उससे बड़ी बाद जब तक धान है तब तक हि सब है!

अमरदीप नारायण प्रसाद

यह ‘राज दरभंगा’ के महारानी का घर है। जब महरानी दुनिया से विदा ले ली तो उसके कुछ ही देर के बाद उनके आवास पर मारा-पीटी हुआ। निश्चित रूप से यह लोभ और मोह का लड़ाई था।
मैंने महारानी का दाह संस्कार भी देखा किसी वीडियो में, आम के लकड़ी का उपयोग हुआ और बगल में एक व्यक्ति बांस से चीता को खोचार रहा था।
सीख ये है की अंत गति यही होना है, ये लगाव, जुड़ाव, मोह, अपनापन,,, ये सब दिखावा है। किसी को तुम्हारा चमकता शरीर चाहिए तो किसी को तुम्हारा धन दौलत। लोग तुम्हें ठगने, लूटने के ताक में है। यकीन मानो, यही सच है।

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