बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में सुधार के पीछे कहीं गहरी साजिश तो नहीं : नीरज यादव

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संजय भारती

समस्तीपुर। बिहार में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराये जाने के फैसले पर चहु ओर घमासान मचा हुआ है। जिसको लेकर इंडिया गठबंधन इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहते हैं कि वंचित, शोषित, गरीबों को वोट देने से रोकने के लिए बिहार के जनता के साथ साजिश किया जा रहा है। वहीं 140 हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के युवा राजद नेता नीरज कुमार यादव ने कहा कि क्या बिहार चुनाव को प्रभावित करने के लिए महाराष्ट्र मॉडल से भी खतरनाक षड्यंत्र बिहार में भी शुरू हो चुका है? नीरज कुमार ने कहा क्या महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी मतदाता सूची में 70-80 लाख फर्जी नाम जोड़ने और इतनी ही संख्या में जेन्युन नामों को हटाने का कोई खेल होने जा रहा है? उन्होंने अखवार में छपी खबर का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग मतदाताओं से कहा कि वे अपने पिता का जन्म का प्रमाण पत्र दिखायें वर्ना आपका नाम काट दिया जायेगा। इस खबर से पता चलता है कि वैसे लोग जिनके मॉं बाप के जन्म का प्रमाण पत्र नहीं है उनके नाम हटा दिए जायेगें। वहीं दूसरी तरफ जिन्होंने या जिन समुहों ने फर्जी प्रमाण पत्र पहले से बना रखा है उनके नाम फर्जी रुप से मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। नीरज यादव ने कहा याद करिये कि हाल ही में यूपीए के नेता राहुल गाँधी जी का एक लेख चर्चा में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मात्र पांच महीने में महाराष्ट्र में 95 लाख लोगों के नाम जोड़ दिए गए। जिन सीटों पर नये नाम जोड़े गए उन सीटों पर किसी खास पार्टी ने जीत दर्ज की। युवा राजद नेता नीरज कुमार यादव ने कहा है कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद से ही देश भर में मतदाता सूची को लेकर सवाल उठ रहे हैं और अब तक चुनाव आयोग की ओर से इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। अब अगर चुनाव आयोग बिहार में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मतदाता सूची में संशोधन के नियमों में कुछ बदलाव करता है तो उसे पहले जनता और सभी हितधारकों को विश्वास में लेना चाहिए। युवा राजद नेता नीरज यादव ने सवाल उठाते हुए पूछा कि पिछली बार जो काम 2 साल में हुआ था, इस बार इसे 25 दिन में कैसे पूरा किया जायेगा? उन्होंने कहा हमारे नेता तेजस्वी यादव जी की मांग केंद्र सरकार 25 दिनों में जातीय जनगणना क्यों नहीं करा लेती है? युवा राजद नेता नीरज कुमार ने बताया कि सत्ता पक्षों के द्वारा गरीबों को वोट देने से रोकने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वोटरबंदी कर रही है। चुनाव आयोग को जनता को भरोसा दिलाना होगा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष है और इसमें कोई गलती नहीं की जाएगी। क्योंकि महाराष्ट्र चुनाव के बाद चुनाव आयोग की कार्यशैली पर जो सवाल उठे हैं, उससे लोगों के मन में यह संदेह या डर पैदा होना स्वाभाविक है। लोगों को शक है, और इस बात का डर है कि भाजपा के लोग और सत्ता में बैठे लोगों के दबाव में कहीं चुनाव आयोग उन लोगों का नाम मतदाता सूची से न हटा दें, जो भाजपा के समर्थक नहीं माने जाते। इसलिए चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया क्या है, इसके मापदंड क्या हैं? और किस आधार पर किसी का नाम हटाया या जोड़ा जाएगा।

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