समस्तीपुर का वारिस कौन..? शाम्भवी और सन्नी में कांटे की टक्कर कोई किसी से कम नहीं।

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chandrakanta news

समस्तीपुर : समस्तीपुर लोकसभा में मतदान बीते सोमवार 13 मई को सम्पन्न हो चुका है । अब राजनैतिक दल के कार्यकर्ता अपने अपने पक्ष को लेकर गणित बैठाकर अपने अपने प्रत्याशी को जीत सुनिश्चित के लिए माथापच्ची कर रहे हैं, यदि आप किन्हीं कारणों से इन राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं से टकरा गए तो आपका घंटा दो घंटा इन राजनैतिक दल के कार्यकर्ता के लिए अनिवार्य हो जाता है, क्योंकि इन राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं को अपने अपने प्रत्याशी के जीत के लिए आकलन जो करना है। यदि आप इन से पिंड छुड़ाना चाहते हैं तो इनके हॉं में हॉं मिलाकर चलते बनिए अन्यथा ये लोग आपका माथापच्ची कर जबतक ये लोग आपसे अपने पक्ष का नही सुन लेता है तब तक आपकी छुट्टी नहीं है इन लोगों के पास से..। यदि कोई तेजतर्रार मतदाता इन लोगों से टकरा जाते हैं तो इनके मनोभाव को समझते हुए इनके पक्ष का बोलते हुए कहे पाये जाते हैं कि अरे आपके प्रत्याशी का तो मेरे गांव और मेरे आसपास के जगहों पर आपके प्रत्याशी के पक्ष में लगभग 75 प्रतिशत मत पड़ा है.. कहते हुए किसी तरह इनलोगो से पल्ला झार कर आगे अपने काम में निकलने को सोचते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा में मतदान का तीन दिन बीत गया है पर ग्रामीण मतदाता अब भी खामोश ही हैं। लेकिन दलीय कार्यकर्ता अपने अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने से कभी पीछे नहीं हट रहे हैं, वहीं मतदाताओं का कहना है कि 4 जून तक सब्र किजिए उस दिन पता चल जायेगा कि आपका प्रत्याशी जीता या नहीं..। मालूम हो कि समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा में बिहार सरकार के जदयू से दो कद्दावर मंत्री महेश्वर हजारी के पुत्र सन्नी हजारी इण्डिया गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी थे तो वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी के पुत्री शाम्भवी चौधरी लोजपा (रा) के प्रत्याशी रही है। समस्तीपुर लोकसभा में जदयू मंत्री के संतानों के लड़ने से समस्तीपुर हॉट सीट बना रहा। वहीं बिहार के दो वरिष्ठ दलित नेता लोजपा (रा) के सुप्रीम चिराग पासवान खुलकर एवं जदयू के वरिष्ठ मंत्री महेश्वर हजारी पर्दे के पीछे से समस्तीपुर में आमने सामने रहे हैं। जिसको लेकर समस्तीपुर का सीट चिराग पासवान व महेश्वर हजारी के लिए प्रतिष्ठा बना हुआ है। वर्तमान राजनीति में दोनों नेता अपने आप को बिहार दलित का असली हितैषी बताने में कभी पीछे नहीं रहते हैं । अब देखना है कि समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा में जनता वोट का चोट देकर समस्तीपुर से किसे बिहार दलित नेता का उपाधि दिया है, जो अभी समय के गर्भ में है। वहीं समस्तीपुर लोकसभा से चुनाव लड़े प्रत्याशियों में रतन बिहारी, मुकेश चौपाल, विद्या नन्द राम, अमृता कुमारी, राम लखन महतों, पिन्कु पासवान, रवि रोशन कुमार, सन्नी हजारी, जीबछ कुमार हजारी, शाम्भवी चौधरी, शशिभूषण दास एवं लालबाबू महतों भी अपनी अपनी जीत सुनिश्चित को लेकर आकलन करने में लगे हुए हैं। वैसे समस्तीपुर चुनावी मैदान में मुख्य रूप से इण्डिया गठबंधन के सन्नी हजारी एवं एनडीए गठबंधन के शाम्भवी चौधरी के बीच सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। समस्तीपुर सुरक्षित सीट को लिया जाए तो बिहार दलित नेता के रूप में प्रसिद्ध रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान ने समस्तीपुर लोकसभा सीट पर अपने परिवार के विरासत को संसद बनाने के लिए समस्तीपुर को बारिकी से सींचा था। जिसे लोजपा (रा) प्रमुख चिराग पासवान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में परिवार को दरकिनार करते हुए जदयू के मंत्री अशोक चौधरी के पुत्री शाम्भवी चौधरी को लोजपा (रा) से टिकट देकर समस्तीपुर में प्रत्याशी बनाया। जिसको लेकर समस्तीपुर लोकसभा सीट चिराग पासवान के लिए प्रतिष्ठा बना हुआ है । समस्तीपुर में लोजपा (रा) प्रत्याशी को लेकर एनडीए गठबंधन के सहयोगियों को सहेजना चिराग पासवान के लिए टेढ़ी खीर के समान रहा है । हलांकि एनडीए गठबंधन की तरफ से एक जुटता की बात कही जा रही है । लेकिन इसके बाबजूद भी बताया जा रहा है कि पार्टी प्रत्याशी को लेकर एनडीए गठबंधन में प्रत्याशी को लेकर चिराग पासवान के प्रति नराजगी भी रहा है । वहीं बताया गया कि समस्तीपुर लोकसभा के निवर्तमान सांसद प्रिंस राज को टिकट से मरहूम होना चिराग पासवान के लिए एक बड़ा चुनौती भी है, क्योंकि परिवारिक विवाद को लेकर चिराग पासवान अपने ही चाचा रालोजपा सुप्रीम पशुपति कुमार पारस एवं चचेरे भाई समस्तीपुर के निवर्तमान सांसद प्रिंस राज से नराज चल रहे हैं । अब देखना है कि इस सब चुनोतियों को स्वीकार करते हुए चिराग पासवान अपने पिता के द्वारा बनाये गए विरासत समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा सीट से एनडीए प्रत्याशी को जीत दिला पाते हैं कि नहीं? समस्तीपुर में दबी जुबान को लिया जाए तो पार्टी प्रत्याशी को समस्तीपुर लोकसभा में अपनों से ही भीतरघात का सामना किया गया है । जिसका खामियाजा पार्टी प्रत्याशी को चुनाव रिजल्ट में भुगतना पड़ेगा । ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो समय आने पर पता चलेगा कि समस्तीपुर लोकसभा की जनता किस ओर करवट लिया है । समस्तीपुर लोकसभा में चुनाव बीत जाने के बाबजूद भी ग्रामीण जनता का खामोशी पार्टी प्रत्याशी के समर्थकों का धड़कन को तेज कर रखा है ।

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