समुदाय स्तर पर कुपोषण एवं एनीमिया ग्रसित बच्चों की पहचान और एनआरसी में उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों की एकदिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

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-कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान होने पर बेहतर उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने का दिया गया निर्देश
-कम वजन वाले कमजोर शिशुओं हो सकते हैं एनीमिया से ग्रसित, बेहतर उपचार से बच्चे हो सकेंगे सुरक्षित

पूर्णिया, 13 जून

जिले में समुदाय स्तर पर कुपोषित एवं एनीमिया ग्रसित बच्चों की समयबद्ध पहचान, उचित रेफरल एवं अस्पताल में प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ बनाते हुए बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ के एम दास की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में सभी प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों से क्षेत्र के कुपोषित एवं अनीमिया ग्रसित बच्चों की अधिकारियों और कर्मियों द्वारा समय पर पहचान करते हुए बेहतर उपचार के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) भेजना सुनिश्चित करते हुए बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किया गया। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जीएमसीएच, पूर्णिया के आरटीपीसीआर भवन में सभी स्वास्थ्य अधिकारियों की एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित किया गया जिसमें प्रभारी सिविल सर्जन डॉ के एम दास, एसीएमओ डॉ आर पी मंडल, डीआईओ डॉ विनय मोहन, जीएमसीएच के शिशु विभाग अध्यक्ष डॉ प्रेम प्रकाश, डीपीएम सोरेंद्र कुमार दास, डीसीएम संजय कुमार दिनकर, डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर, डीसीक्यूए डॉ अनिल कुमार शर्मा, जिला एम&ई अधिकारी आलोक कुमार, पोषण परामर्श केंद्र (एनआरसी) के चिकित्सक डॉ रजनीश कुमार, एनआरसी स्टाफ नर्स रवि शर्मा, नीरज कुमार, आरबीएसके जिला कोऑर्डिनेटर डॉ संदीप कुमार, यूनिसेफ पोषण समन्यवक निधी भारती, पिरामल स्वास्थ्य प्रमंडल समन्यवक अमित शर्मा, पिरामल जिला प्रबंधक चंदन कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।

कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान होने पर बेहतर उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने का दिया गया निर्देश : डीपीसी

बैठक में स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा गया कि कमजोर और अस्वस्थ्य शिशुओं की पहचान जन्म के कुछ समय बाद ही हो जाती है। ऐसे बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकारियों द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजना सुनिश्चित करना है। क्षेत्र में कमजोर पाए जा रहे शिशुओं को एएनएम व आशा कर्मियों द्वारा पहचान करते हुए बेहतर उपचार के लिए बच्चों को माता सहित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजना सुनिश्चित करना चाहिए। डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि एनआरसी में प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा बच्चों को आवश्यक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए बच्चों को स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाकर घर भेजा जाता है जिससे बच्चे अपना जीवन स्वस्थ्य और सुरक्षित बनाने हुए इसका लाभ उठा सकते हैं।

कम वजन वाले कमजोर शिशुओं हो सकते हैं एनीमिया से ग्रसित, बेहतर उपचार से बच्चे हो सकेंगे सुरक्षित :

बैठक में जीएमसीएच पूर्णिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेम प्रकाश ने बताया कि जन्म के साथ कमजोर होने वाले शिशु एनीमिया से ग्रसित हो सकते हैं। ऐसे शिशुओं की शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) या हेमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। ऐसे बच्चों की समय पर पहचान करते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सहायता प्रदान करना आवश्यक है। क्षेत्र में ऐसे ग्रसित बच्चों की पहचान होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा बच्चों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना चाहिए। बहुत कमजोर शिशु को विशेष उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए ताकि बच्चा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता का लाभ उठाते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन का लाभ आसानी से उठा सकें।

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