अन्नदाताओं को बैंकों ने अदालत के माध्यम से थमाया नोटिस, किसान को अदालत की शरण में जाने को किया जा रहा मजबूर।

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अमरदीप नारायण प्रसाद।

उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक सहित अन्य बैंकों द्वारा किसानों को लोन अदायगी के लिए धराधर नोटिस भेजा जा रहा है। इसमें बैंक द्वारा वसूली हेतु न्यायालय में वाद/सर्टिफिकेट केस//रिकवरी नोटिस सक्षम अधिकारी के समक्ष दायर किया गया है जहां 11 सितंबर 2021 को उपस्थित होने को कहा गया है। परिस्थिति के मारे बेहाल किसान को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है, क्या करें और क्या न करें।
ज्ञात हो कि किसानों की हालत 2016 के नोटबंदी से जो खराब होना शुरू हुई, फिर 2017 में जीएसटी, 2018-19 में ओलावृष्टि एवं सूखा, महंगाई से बद से बद्तर स्थिति होती चली गई फिर 2020-21 में कोरोना के लाॅकडाउन के बाद पिछले तीन महीने से लगातार अत्यधिक वर्षा के जलजमाव से समूचा फ़सल ही बर्बाद हो गया है। किसान नमक- तेल खरीदने की स्थिति में नहीं है। बर्बाद फसल के मुआवजा हेतु अधिकारी एव सरकार की ओर ध्यान लगाये हुए हैं कि कुछ राहत मिल सके। इस बीच बैंक द्वारा यह नोटिस आत्महत्या की ओर ले जाने वाला है।
अखिल भारतीय किसान महासभा एवं भाकपा-माले ताजपुर ने यह तय किया है कि हम किसानों को आत्महत्या नहीं करने देंगे। इस नोटिस के खिलाफ किसानों को गोलबंद कर बैंक के साथ साथ शासन-प्रशासन के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके आन्दोलन कर किसानों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ संघर्ष तेज करेंगे।

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