कुसुम सदन में आयोजित काव्य गोष्ठी में हुआ प्र अ मुकेश कुमार द्वारा संपादित पुस्तक मनोरम बेला का लोकार्पण।

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समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के कुसुम पांडे स्मृति साहित्य संस्थान में रविवार को रेलवे के पूर्व राजभाषा अधिकारी भुनेश्वर मिश्र की अध्यक्षता एवं प्रसिद्ध गजलकार प्रवीण कुमार चुन्नू के संचालन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के संस्थापक शिवेंद्र कुमार पांडे के द्वारा मार्च माह में जन्मे विभूतियां के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा व श्रद्धांजलि अर्पण से हुई। इसके बाद कवि सम्मेलन की शुरुआत डा.रामसूरत प्रियदर्शी द्वारा सरस्वती वंदना से की गई।तदोपरांत प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार के द्वारा संपादित नवीनतम कीर्ति ” मनोरम बेला ” का समवेत रूप से लोकार्पण किया गया। अपनी रचनाओं को सुनाते हुए कविवर शिवेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि सनातन नव वर्ष का प्रथम दिन है मंगलकारी,चैती नवरात्रि के उत्सव का प्रारंभ हुआ मनोहारी,कवि राजकुमार राय राजेश ने कहा वक्त ही लाये बहारें या खींजा,वक्त है सबसे प्रबल आगे बढ़ो,गजलकर प्रवीण कुमार चुन्नू ने कहा उम्र कोई दरमियान दीवार है, आपसे जब प्यार है तो प्यार है, जिस तरह से कोसते हैं लोग ये, जिंदगी इतनी सी भी क्या दुश्वार है, वही मुकेश कुमार ने कहा गुजरे जमाने की याद में उलझना नहीं है आज, बदल गए हैं रंग-ढंग साज और आवाज, मुख्य अतिथि के रूप में गजलकार कासिम सबा ने कहा पोशीदा आस्तीन में खंजर न हो कहीं, यारों के इस हुजूम में जाफर न हो कहीं, अध्यक्ष भुवनेश्वर मिश्र ने कहा अब अगर कुछ याद हो मेरी प्रिय,तेरे खातिर जान न्योछावर करूंगा,कवि राजकुमार चौधरी ने कहा हे भगवान बचाना इन तीनों से,डॉक्टर,पुलिस और हसीनों से,अधिवक्ता अशोक वर्मा ने कहा गुमनाम हूं मैं ऊपर वाले का एहसान है मुझपे,मशहूर नहीं होना है अपनों के गर्दन काटकर, जीवछ राय वीराना ने कहा हमसा दीवाना कोई है न जमाने में, जमाना गुजर गया उनको ही मनाने में, हास्य कवि विष्णु केडिया ने कहा मेरी पोती जब सामने आती है,बाबा बाबा कह कर बुलाती है,कवित्री स्मृति झा ने कहा अवधपति वनवास न देना,अब मेरे राम कहां जाएंगे,अरविंद सत्यार्थी ने कहा कितने हैं जो सच लिखते हैं, अच्छे भी बचकर लिखते हैं, गजलकार मो.जावेद ने कहा जब से गुलशन है यह जमाना, वक्त के दरम्यान गुलाब ले लो,वहीं काबिश जमाली ने कहा अब किसी की कहां कदर में है, अजनबी सा वो अपने घर में है,रिंकू शर्मा ने कहा काश, तूने वह पत्थर मार दिए होते, युवा कवि दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा अपना बिहार,प्यारा बिहार, इसको जानता है सारा संसार ,वही पत्रकार मिंटू कुमार झा ने कहा मेरा प्यार कोई फसाना नहीं है,कसम राम की यह बहाना नहीं है, प्रसिद्ध कवि रामाश्रय राय राकेश ने कहा समय चक्र का खेल गजब है,रहस्यमई हर हलचल है, डॉ. रामसूरत प्रियदर्शी ने कहा अहिं क खातिर हम जिवैछी, किये लै छी प्राण,ये सजनी, घूरि आबू अपन गाम,डॉ.परमानंद लाभ ने कहा अन्तस केर आंख मिचौनी में,हमरा जौं एहसास होइत।इस तरह काव्य गोष्ठी में एक से बढ़कर एक हिन्दी,उर्दू,अंगिका,बज्जिका और मैथिली भाषा में रचनाओं को सुना कर कवियों ने खूब ताली बटोरा।एक ओर जहां डॉ. रमेश गौरीश ने दूर दूर से आए कवियों का स्वागत किया तो कुमारी शैलजा कनिष्ठ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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