जनता ने तीसरी बार ममता पर भरोसा किया

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प्रदीप कुमार नायक
मार्च और अप्रैल में कोरोना काल के बीच हुए पांच राज्यों के चुनाव से भाजपा को खासी उम्मीद थी।लेकिन पश्चिम बंगाल में उसके साथ निराशा ही लगी हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्रीयों की फौज को उतारने वाली भाजपा पश्चिम बंगाल में धराशायी हो गई।हमारे देश के प्रधानमंत्री चुनाव प्रचारक हैं।चुनाव जीतने की इच्छा उनके मनमें हमेशा रहती हैं।टीएमसी की जीत ने सावित कर दिया कि जीत सच्चाई की होती हैं।
भाजपा ने चुनाव आयोग, केन्द्रीय पुलिस बलों,इ वी एम सेटींग , पैसे के बल पर नेताओं व मतदाताओं को खरीदने, मिडिया के इस्तेमाल जैसे तमाम तिकड़मों के बाद भी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार हुई है।इन राज्यों के चुनाव प्रबंधन से लेकर प्रचार अभियान संचालित करने वाले देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के भाजपा को जिताने के अपील को जनता ने नकार दिया। ऐसे में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा के चाल चरित्र को लोग पहचान गये है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेताओं द्वारा ममता बनर्जी के बारे में विभिन्न तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल किया। बंगाल के भद्र मानुष भाजपा के कुप्रचार व अपशब्दों को चुनाव में भाजपा को हरा कर ज़बाब दिया है। आने वाले दिनों में भाजपा को और करारी हार का सामना करना होगा।
सलाम हैं बंगाली भाई और बहिनों को जो अमन पसंद हैं, निर्भय हैं, स्वाभिमान हैं।महिषा मर्दनी, ममतामयी ममता बनर्जी जी को उनके धैर्य और अविचलित अडिग साहस के लिए सलाम हैं, तहे दिल से बधाई हैं।

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