जिउतिया व्रत पर विशेष…..

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जिउतिया व्रत 10 सितंबर को रखेगी 24 घंटे के इस वर्ष में व्रती महिला निर्जला और निराहार रहती है सनातन धर्मावलंबियों में इस व्रत का खास महत्व है। जिउतिया व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को रखा जाता है।
उगन महादेव ज्योतिष केंद्र के संस्थापक पंडित संजय शुक्ला शास्त्री ने इसके तिथि और मुहूर्त के बारे में जानकारियां देते हुए बताया कि इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 9 सितंबर की रात में 9:00 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगा और 10 सितंबर की रात 10/57तक रहेगा 10 सितंबर को अष्टमी में चंद्रोदय का अभाव है। इसी दिन जिउतिया पर्व मनाया जाएगा। व्रत के 1 दिन पहले सप्तमी 9 सितंबर की रात महिलाएं नहाए खाए करेगी गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद मरुआ के रोटी नोनी का साग कांदा झुगुनी आदि का सेवन करेगी। व्रती महिलाएं स्नान के बाद बाद पितरों की पूजा भी करेगी। नहाए खाए की सभी प्रक्रिया 9 सितंबर की रात 9:54 से पहले ही करना होगा क्योंकि 9:54 के बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। जिउतिया व्रत का पारण करने का शुभ समय एक 11 सितंबर सुबह सूर्य उदय से लेकर दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा वरती महिलाओं को जिउतिया व्रत के अगले दिन एक 11 सितंबर को 12:00 बजे से पहले पारण करना होगा।
नहाखाय इस दिन जीवित्पुत्रिका व्रत का पहला दिन होता है। इस दिन से व्रत शुरू होता है इस दिन महिलाएं नहाने के बाद एक बार भोजन करती है इस व्रत को करते समय केवल सूर्योदय से पहले ही खाया पिया जाता है सूर्य उदय के बाद आपको कुछ भी खाने पीने की सख्त मनाही होती है। ईश्वर से पहले केवल मीठा भोजन ही किया जाता है व्रत में जीमूत वाहन का कथा श्रवणजरूर करना चाहिए।

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