मछुआरों व नाविकों के बच्चों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, सुनिश्चित रोज़गार प्रदान करेगा : हरि सहनी

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संजय भारती

पटना। राष्ट्रीय अंतर्देशीय नेविगेशन संस्थान (निनि) एवं बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को बिहार के परंपरागत मछुआरा एवं नाविक समाज के लिए ऐतिहासिक, दूरगामी और पीढ़ीगत प्रभाव वाला निर्णय बताया गया है। 297वें निदेशक बोर्ड के उद्घाटन में बिहार सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरि सहनी ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार को पिछले वर्ष ही एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा जा चुका है, जिस पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। आने वाले समय में वॉटर मेट्रो से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। आगे उन्होने यह भी कहा कि “देश के कई राज्यों में वाटर मैट्रो, इनलैण्ड वाटर ट्रन्सपोर्ट, रिवर क्वीजीन और जल पर्यटन परियोजनाएँ तेज़ी से विकसित हो रही हैं। आने वाले समय में बड़े-बड़े वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू होंगे, जहाँ प्रशिक्षित नाविक, मास्टर, क्रू, इंजन ऑपरेटर और सेफ्टी स्टाफ की भारी मांग होगी।” इस एमओयू के तहत कॉफ्फेड से जुड़े राज्य के लगभग 16 लाख परंपरागत मछुआरों एवं 880 मत्स्य सहकारी समितियों के बच्चों को नेविगेशन, शिपिंग, इनलैंड वेसल संचालन, जल परिवहन एवं जल पर्यटन से संबंधित व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा तथा उन्हें देश और विदेश में सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री ऋषिकेश कश्यप, प्रबंध निदेशक, कॉफ्फेड एवं डॉ. केतन ईश्वर सोलंकी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, निनि ने संयुक्त रूप से कहा कि यह समझौता रोज़गार सृजन, सामाजिक न्याय और ब्लू इकोनॉमी की दिशा में एक मजबूत कदम है। श्री ऋषिकेश कश्यप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नदियों पर पुल बनने से बेरोज़गार हुए नाविकों के लिए “राज्य और देश भर में नदियों पर पुलों के निर्माण से परंपरागत नाविक और मछुआरे, जो पहले नाव द्वारा यात्री और सामग्री परिवहन से जुड़े थे, धीरे-धीरे बेरोज़गार होते चले गए हैं। यह एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक सच्चाई है।” उन्होंने कहा कि निनि-कॉफ्फेड प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसे सभी बेरोज़गार या आजीविका खो चुके नाविक-मछुआरा परिवारों के बच्चों के लिए वैकल्पिक, सुरक्षित और सम्मानजनक रोज़गार का रास्ता खोलेगा। “इस प्रशिक्षण के बाद केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार में स्थायी रोज़गार सृजन और आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।” श्री कश्यप ने राज्य एवं केंद्र सरकार से स्पष्ट और ठोस मांग करते हुए कहा कि “रोज़गार उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक, सामाजिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है। जब विकास परियोजनाओं के कारण परंपरागत आजीविका समाप्त होती है, तब वैकल्पिक कौशल और रोजगार देना सरकार का दायित्व बन जाता है।”
कॉफ्फेड के 297वें निदेशक बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रयाग सहनी ने कहा कि कॉफ्फेड से जुड़े परंपरागत मछुआरों/नाविकों के बच्चों की पूरी प्रशिक्षण फीस राज्य व केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मछुआ परिवारों का कोई भी योग्य बच्चा इस अवसर से वंचित न रहे। डॉ. सोलंकी ने बताया कि निनि-कॉफ्फेड एमओयू के माध्यम सेकृस्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, बाहरी श्रमिकों पर निर्भरता में कमी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। निनि आधुनिक प्रशिक्षण का राष्ट्रीय केंद्र है जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में हुई। यह संस्थान गंगा नदी के किनारे 7 एकड़ क्षेत्रफल में स्थित है, पिछले 5 वर्षों में 2300 से अधिक छात्र प्रशिक्षित एवं अगले 4 वर्षों में 4000 नाविक तैयार करने का लक्ष्य है। प्रमुख कोर्स-जनरल परपज़ रेटिंग (जीपीआर), अवधिरू लगभग 3 माह, योग्यतारू 10वीं पास, आयु सीमारू 18दृ25 वर्ष, फीसरू लगभग 35,200 है। प्रवेशरू ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से, 100 प्रतिशत प्लेसमेंट का दावा, प्रशिक्षण सुविधाएँ-दो ट्रेनिंग वेसल (एक छोटा, एक बड़ा), सिम्युलेटर आधारित ट्रेनिंग, स्विमिंग, सेफ्टी व एटीट्यूड ट्रेनिंग, वास्तविक शिप लाइफ पर आधारित प्रैक्टिकल, मास्टर, सरंग, इंजन ड्राइवर जैसे एडवांस कोर्स, आगामी लैंग्वेज लैब, जहाँ अंग्रेज़ी सहित अतिरिक्त भाषाओं का प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय रोज़गार के अवसर निनि से प्रशिक्षित छात्रकृअंडमान-निकोबार, देश के विभिन्न इनलैंड वॉटर रूट्स, तथा विदेशी जहाजों पर सफलतापूर्वक कार्यरत हैं। कॉफ्फेड इस एमओयू के अंतर्गत मछुआरा/नाविक परिवारों के बच्चों की पहचान, काउंसलिंग व नामांकन, प्रशिक्षण फॉलो-अप तथा रोजगार से जोड़ने के लिए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा। यह पहल सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि पीढ़ीगत रोजगार सुरक्षा का मॉडल बनेगी। निनि-कॉफ्फेड एमओयू बेरोज़गार होते परंपरागत नाविकों के लिए नई दिशा, मछुआरा परिवारों के बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर ब्लू इकोनॉमी को मजबूती और सामाजिक न्याय आधारित विकास का एक राष्ट्रीय मॉडल स्थापित करेगा। बैठक में निदेशकगण् राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के क्षेत्रिय निदेशक, कॉफ्फेड के निदेशकगण् शिवनंदन प्रसाद, अरूण सहनी, प्रदीप कुमार सहनी, लालो सहनी, इंदर मुखिया, कपिलदेव सहनी, निरंजन कुमार सिंह, नरेश प्रसाद सहनी, अशोक कुमार चौधरी, पद्मजा प्रियदर्शनी, कुमार शुभम, सानिध्य राज, अभिलाष कुमार, शिवानी देवी, मिनाक्षी कुमारी, राकेश कुमार, मदन कुमार, लाल बाबू सिंह, लाल बाबू सहनी एवं सुश्री सिमरन तथा पदाधिकारीगण् रवि राज एवं गोपी कुमार उपस्थित थे।

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