सिंचाई जल प्रबन्धन के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम हुआ!

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अमरदीप नारायण प्रसाद

डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अन्तर्गत अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, सिंचाई जल प्रबन्धन के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम हुआ! जिसका विषय ‘‘सतत कृषि के लिए नवचारी सिंचाई जल प्रबन्धन विकल्प‘‘ दिनांक 28.01.2026 को आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अन्तर्गत हुआ। डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अन्तर्गत अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत आयोजित की गयी थी। कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक अनुसन्धान डाॅ0 ए.के. सिंह ने विधिवत दीप प्रज्वलित कर किया। उनहोंने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे किसानों खासकर महिला किसनों को पानी की महता की जानकारी देेते हुए बताया कि फसलों में सिंचाई करते समय पानी की आवश्यकता के अनुसार हीं भूमिगत सिंचाई जल का उपयोग करें ताकि भविष्य में पानी की समस्या से बचा जा सके। निदेशक अनुसन्धान ने जल प्रबन्धन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की एवं इस कार्यक्रम के सफलता की कामना की। स्वागत डाॅ0 आर0 के0 तिवारी, वरीय वैज्ञानिक सह प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, बिरौली ने किया। कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसन्धान परियोजना के प्रधान अन्वेषक डाॅ0 रविश चन्द्रा ने विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कई नवचारी सिंचाई जल प्रबन्धन विकल्प जैसे की सूक्ष्म सिंचाई पद्धति, प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने वाली तकनीकें, जीरो टिलेज, लेजर लेवलिंग, बेड प्लाटिंग, फसल अवशेष प्रबन्धन आदि उपलब्ध हैं। इसे अपनाकर जल उत्पादकता उन्नयन किया जा सकता है। इस अवसर पर डा0 एस0के0 जैन, परियोजना निदेशक, जल प्रबन्धन उत्कृष्टता केन्द्र एवं डाॅ0 मुकेश कुमार, प्राध्यापक, अनुसंधान निदेशालय ने भी अपने विचार साझा किये। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ0 अशोक कुमार सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में 75 से ज्यादा किसानों की सहभागिता दर्ज करी।

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