समस्तीपुर जिला के पाहेपुर गाँव के होमियोपैथिक चिकित्सक डा0 आर0 के0 दिवाकर ने लोक सभा अध्यक्ष सह सांसद एवं राज्य सभा अध्यक्ष सह सांसद को संयुक्त रूप से पत्र लिखकर सुखी जीवन का द्वार नशामुक्त भारत का आह्वान की माँग किया है। अपने पत्र के माध्यम से डा0 दिवाकर ने लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा अध्यक्ष एवं दोनों सदनों के सदस्यों का ध्यान स्वास्थ्य शिक्षा और नशामुक्ति शिक्षा के अभाव में स्वच्छता अभियान वास्तविक दिशा में नहीं अग्रसर हो पाने की ओर आकर्षित किया है। केवल विद्यालयी शिक्षा ग्रहणकर देश के युवा वर्ग घोर अवसाद के चपेट में आ रहा है तदफलस्वरुप युवा वर्ग के साथ – साथ कम उम्र के बच्चे भी नशा के गिरफ्त में जाकर अपना जीवन बर्वाद कर रहा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के चेतावनी एवं अनुभवी चिकित्सकों की सलाह वर्षों से आती रही है कि नशा उत्पाद का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है फिर भी भारत सरकार द्वारा नशा उत्पाद के लिए लाईसेन्स जारी किया जा रहा है। नशा उत्पाद के सेवन से जनसंख्या का लगभग 80%आबादी प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से कुप्रभावित होती है। 20% वे लोग लाभान्वित होते हैं जो उत्पादन और बिक्री से जुड़े होते हैं। देश में विभिन्न भागों में हो रही दुर्घटनाओं में नशीला पदार्थों के सेवन का कारण अधिक बताते हुए बिहार राज्य का उदाहरण से स्पस्टीकरण किया गया है जहाँ शराब बन्दी कानून के बाद से सड़क दुर्घटनाएँ, घरेलू हिंसाएँ तथा अन्य घटनाओं में अत्यधिक कमी आई है। मानव जीवन के मूल्य पर राजस्व प्राप्ति करके हम लोक कल्याणकारी राज्य या राष्ट्र की कल्पना नहीं कर सकते हैं। मानव जीवन का कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता पर राजस्व प्राप्ति का विकल्प सम्भव है। रोजगारयुक्त शिक्षा, नैतिक शिक्षा, स्वच्छता प्रदत्त शिक्षा,नशामुक्ति प्रेरणादायक जागरुकता शिक्षा एवं स्वास्थय शिक्षा के आधार पर भारत में पनप रहे कुरीति एवं गन्दे सामाजिक व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है। डा0 आर0 के0 दिवाकर ने भारत में नशामुक्त राष्ट्र की नीव डालकर भारत के भावी पीढ़ी के सुखद जीवन के द्वार खोलने की ओर प्रमुखता से ध्यान देने की जरूरत कहा है।



















































