चालीस साल से विरान विद्यापतिनगर का हरिजन छात्रावास, भवन हुआ जर्जर।

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अमरदीप नारायण प्रसाद

समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड मुख्यालय के राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय परिसर में स्थित हरिजन छात्रावास सालों से विरान पड़ा हुआ है। इस छात्रावास के निर्माण के चालीस साल बीत जाने के बाद भी न तो इसका उद्घाटन किया गया और ना ही किसी छात्र को रहने के लिए इसमें कमरा दिया गया। अब तो इस छात्रावास की दशा काफी बिगड़ गई है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि सालों पहले प्रखंड मुख्यालय में हरिजन छात्रावास का निर्माण कार्य शुरू हुआ। निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद से छात्रावास से राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय का वर्ग संचालित होने लगा। लेकिन कुछ साल बाद वह भी बंद हो गया। तब से हरिजन छात्रावास विरान पड़ा हुआ है। इस छात्रावास का न तो उद्घाटन किया गया और ना ही किसी छात्र को कमरा आवंटित किया गया। अब तो इस छात्रावास की दशा किसी के रहने लायक भी नहीं रह गई है। छात्रावास की दीवारों के प्लास्टर गिर रहे हैं। छत से बारिश का पानी टपकता है। लोग बताते हैं कि गंदगी के कारण अब इस छात्रावास में प्रवेश करना भी मुश्किल हो गया है।
दलित छात्रों को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की कवायद विद्यापतिनगर प्रखंड में महज कागज पर ही दिखता है। इसकी सुध न तो समाजसेवा का दंभ भरने वाले जनप्रतिनिधियों को है न ही अधिकारियों को ही। 1982 ई.में बनकर तैयार आंबेडकर छात्रावास 40 साल बा इस गंभीर और सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर धुंध के बादल छा गए हैं। जहां सुनहरे भविष्य गढ़ने के सपने देखने वाले दलित बच्चों के ख्वाब दफन हो गए है। प्रखंड क्षेत्र के गरीब बच्चों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराने के व्यापक उद्देश्य से जननायक कर्पूरी ठाकुर की पहल पर बनाया गया अनुसूचित जाति छात्रावास अपने निर्माण के लगभग चार दशक बाद भी उद्घाटन की आस में हैं। नतीजतन 40 वर्ष बाद भी इसका उपयोग नहीं हो सका है। सन 1980 के मार्च में लगभग आठ लाख रुपये की लागत से दो मंजिला भवन में छह कमरे, रसोईघर, शौचालय, वार्डेन रूम, गार्ड रूम आदि का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। लगभग दो वर्षों में बन कर तैयार हो गया।
विभागीय उदासीनता के कारण छात्रावास के उद्देश्य पर ग्रहण छा गया। 1982 में बनकर तैयार यह छात्रावास आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाते हुए किसी उद्धारक की बाट जोह रहा है। इन दिनों यह असामाजिक तत्वों का सेफ जोन और आवारा पशुओं का तबेला बन गया है। रसोइया और रात्रि प्रहरी की सेवा भी हुई समाप्त प्रखंड मुख्यालय में बनाया गया एकमात्र अनुसूचित आवासीय छात्रावास अपने गर्भ में कई महत्वाकांक्षी उद्देश्यों को धारण कर अपनी आखरी सांसें गिन रहा है। सारे के सारे अरमान दफन हो गए।

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