अंतरराष्ट्रीय ई संगोष्ठी संपन्न

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रोहतक ( हरियाणा )
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर के सभागार में हिन्दी विभाग एवं आई. क्यू. ए. सी. के तत्वाधान में एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅ0 सुनीता सिंह के संयोजन में सम्पन्न हुई। संगोष्ठी में बीज वक्ता के रूप में पूर्व अध्यक्ष हिन्दी और भारतीय भाषा विभाग तथा संचार विभाग, लखनऊ प्रो0 सूर्य प्रसाद दीक्षित, मुख्य अतिथि डाॅ0 निखिल कौशिक, चिकित्सक व हिन्दी लेखक ब्रिटेन, विशिष्ट वक्ता अनिल जोशी उपाध्यक्ष केन्द्रिय हिन्दी शिक्षा मण्डल शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, विशिष्ट वक्ता डाॅ0 विजय दत्त शर्मा पूर्व निदेशक हरियाणा ग्रंथ अकादमी पंचकूला हरियाणा, विशिष्ट वक्ता डाॅ0 अमिता दुबे सम्पादन-उत्तर-प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रामसजन पाण्डेय ने की।
कुलपति प्रो0 राम सजन पाण्डेय व अधिष्ठाता प्रशासन अंजना राव, अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रो0 सतीश चन्द्र शर्मा, अधिष्ठाता मैनेजमेंट प्रो0 रामफूल शर्मा, हिंदी विभागाध्यक्ष, डाॅ0 सुनीता सिंह आदि ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
प्रो0 सूर्य प्रसाद दीक्षित ने हिंदी की वैश्विक महत्ता को बताते हुए कहा कि हिंदी के प्रचार प्रसार में भारतीयों के साथ-साथ विदेशियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और हिंदी साहित्य विश्वकोष का साहित्य है। हिंदी अपनी सहजता, सरलता, सहिष्णुता आदि के कारण निरंतर वैश्विक स्वीकृति को प्राप्त कर रही है। प्राचीन भारतीय धर्मग्रन्थों, रामायण, महाभारत, गीता, वेदों, उपनिषदों की मांग वैश्विक फलक पर बढ़ती जा रही है। साथ ही साथ हिन्दी शब्दों, प्रतीक चिह्नों, गानों, कहानियों का भी विभिन्न भाषाओं में रूपांतर हो रहा है। डाॅ0 निखिल कौशिक ने ब्रिटेन के हिंदी पर बोलते हुए कहा कि ब्रिटेन कें लाखो भारतीय रहते हैं और वे हिन्दी के माध्यम से आत्मीयता से बंधे हैं। अपनी हिन्दी मातृभाषा, अपनी मातृभूमि की सोंधी खुश्बू देती हैं। ब्रिटेन के बहुत सारे महाविद्यालयों में हिन्दी का अध्ययन होता है व शोध कार्य हो रहा है।
डाॅ0 अमिता दुबे ने स्वतंत्रता आंदोलन में ंिहंदी की भूमिका पर बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय आन्दोलन में कवियों व लेखकों की सशक्त भूमिका रही। मातृभूमि की स्वतंत्रता में कवियों ने धर्म, जाति, भाषा को भूलाकर अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीयों में स्वतंत्रता के मंत्र फूँके। अनिल जोशी ने हिन्दी साहित्य के वैश्विक चेतना पर कहा कि ंिहंदी सनातन धर्म की पूँजी है जो नवीन प्रगतिशील का समर्थन ही नहीं करती वरन् उन्हें आत्मसात भी करती है। अपनी सद्भावना के कारण ही आज हिन्दी दुनिया की दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। छठें वक्ता डाॅ0 विजय दत्त शर्मा ने ‘प्रवासी साहित्य’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 180 वर्ष पूर्व अंग्रेजों ने अपनी साम्राज्यवादी हितों की पूति हेतु लाखो भारतीयों को त्रिनिनाड़, भयाना, सूरीनाम, मारीशस आदि देशों में बसाया। इतने वर्षों बाद भी ये प्रवासी हिन्दी भाषा के माध्यम से ही अपनी सभ्यता व संस्कृति से जुड़े हुए है। हिन्दी के वैश्विक प्रसार में प्रवासियों का बहुमूल्य योगदान है।
अपने अध्यक्षीय सम्भाषण में कुलपति प्रो0 रामसजन पाण्डेय ने ‘हिन्दी की प्रासंगिता’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दी मात्र विचार सम्प्रेषण का ही माध्यम नहीं है वरन् यह एक सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। अपने विराट व्यक्तित्व के कारण ही हिन्दी का प्रभाव ज्ञान-विज्ञान के सभी क्षेत्रों में बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही साथ हिन्दी रोजगार, तकनीकी के क्षेत्र में भी असीम संभावनाओं के द्वार खोल रही है।
प्रो0 सतीश चन्द्र शर्मा ने समापन सम्बोधन में कहा कि बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय गुणवत्तापरक शिक्षा के प्रति पूर्णतः समार्पित है। यही हमारा एकमात्र लक्ष्य है। इसी कारण हम शिक्षा व शोध कार्यों में निरन्तर उत्कृष्ट करने हेतु क्रियाशील है। प्रो0 शर्मा ने ई0 संगोष्ठी में भाग लेने वाले अतिथिगण, प्रतिभागियों, टेक्नीकल स्टाफ तथा उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया तथा सफल संगोष्ठी हेतु हिन्दी-विभाग की अध्यक्ष डाॅ0 सुनीता सिंह, डाॅ0 समुन राठी, डाॅ0 प्रवेश कुमारी को शुभकामनाएँ दी। इस असवर पर डाॅ0 जे0 के0 शर्मा, डाॅ0 सरोज बाला, डाॅ0 उर्मिला शर्मा, डाॅ0 देवेन्द्र वशिष्ट, डाॅ0 राजकुमार, प्रो0 बी0 डी0 आर्या, डाॅ0 अरूणा आंचल, डाॅ0 मनोज, डाॅ0 कृष्णा आदि उपस्थित रहे।

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