-पोषणयुक्त सामग्री खाने के साथ साथ नियमित दवा सेवन से जल्द रोगमुक्त हो जाते हैं लाभार्थी : जिलाधिकारी
-नियमित दवा के साथ प्रोटीनयुक्त आहार लेने से रोगी जल्द ठीक हो जाते हैं : सिविल सर्जन
-जिले में 01 हजार 272 निक्षय मित्रों द्वारा लगभग 02 हजार 500 से अधिक टीबी रोगियों को वितरित किया गया है फूड बास्केट
पूर्णिया, 15 अप्रैल
जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 डे कैम्पेन अंतर्गत जिलाधिकारी अंशुल कुमार द्वारा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी पूर्णिया के सौजन्य से निक्षय मित्र बनकर जिले के 40 टीबी महिला रोगियों को पोषणयुक्त फूड बास्केट का वितरण किया गया। इस दौरान टीबी ग्रसित मरीजों को जिलाधिकारी अंशुल कुमार द्वारा फूड बास्केट्स में पोषणयुक्त सामग्री के रूप में मूंगफली, सोयाबीन, चना, मूंग, मसूर, दाल, आंटा, राजमा, चना का सत्तू युक्त प्रोटीन युक्त सामग्री का वितरण किया गया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मो तनवीर हैदर, चिकित्सक डॉ दिनेश कुमार, डीपीएम स्वास्थ्य सोरेंद्र कुमार दास, एपिडेमियोलॉजिस्ट नीरज कुमार निराला, केएचपीटी के जिला समन्यवक मो मासूम रजा, डब्लूएचपी के फील्ड अधिकारी अभिषेक कुमार, शिवम कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति वैश्यन्त्री के साथ साथ जिला यक्ष्या केंद्र के टीबी पर्यवेक्षक, डीपीएस राजेश शर्मा,
राजनाथ झा, तपन मिश्रा, अनिला नन्द झा, राकेश सिंह, धीरज निधि, अखिलेश,पूजा, ममता, प्रिया, अमित, रंजीत आदि कर्मी द्वारा कार्यक्रम में आवश्यक सहयोग किया गया।
पोषणयुक्त सामग्री खाने के साथ साथ नियमित दवा सेवन से जल्द रोगमुक्त हो जाते हैं लाभार्थी : जिलाधिकारी
जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि टीबी रोगियों को सुरक्षित रहने के लिए नियमित दवा सेवन के साथ साथ आवश्यक पौस्टिक आहार का सेवन जरूरी होता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निक्षय मित्र सहयोगियों के सहयोग से टीबी रोगियों के लिए आवश्यक पौष्टिक आहार उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें लाभार्थियों के लिए राजमा, सत्तू, मूंगफली, चना आदि जरूरी होता है जो टीबी ग्रसित रोगियों के शरीर को मजबूत बनाने रखता है। सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति वैश्यन्त्री ने कहा कि इस प्रकार का खाना हर लोगों के घरों में भी रहता है। इसका नियमित उपयोग करते हुए टीबी उपचार के लिए आवश्यक दवाई का उपयोग करने से लोग समय से टीबी बीमारी से सुरक्षित हो सकते हैं।
फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी : सीएस
सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाती और वहीं बढ़ने लगती है। इस तरह से संक्रमण रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन व ब्रेन तक पहुंच जाती है। आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं। वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता है। लक्षण दिखाई देने पर लोगों द्वारा नजदीकी अस्पताल में अपनी जांच करानी चाहिए जिससे कि समय पर टीबी संक्रमण की पहचान करते हुए उसका इलाज सुनिश्चित किया जा सके और लोग संक्रमण से सुरक्षित रह सकें।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमण की संभावना अधिक :
सिविल सर्जन डॉ कनौजिया ने बताया की ट्रयूबरक्लोसिस दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक लेंटेंट टीबी होता है जिसमें टीबी की बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होती हैं लेकिन उनमें लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं। लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर इसका असर उभर कर देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों से टीबी रोगियों का पता चल पाता है। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क टीबी जांच और उपचार सुविधा उपलब्ध है जिसका ग्रसित लोगों को लाभ उठाना चाहिए।
ये लक्षण दिखें तो करायें टीबी जांच :
-तीन सप्ताह या इससे अधिक समय से खांसी रहना, छाती में दर्द, कफ में खून आना।
-कमजोरी व थका हुआ महसूस करना।
-वजन का तेजी से कम होना।
-भूख नहीं लगना, ठंड लगना, बुखार का रहना, रात को पसीना आना इत्यादि।






















































