अमरदीप नारायण प्रसाद
गया। पति की दीर्घायु और सुखमय जीवन के लिए सुहागिन महिलाओं ने बरगद वृक्ष के पूजन के साथ वट सावित्री व्रत की विधि विधान से पूजा की और भगवान से पति की दीर्घायु के लिए आशीर्वाद लिया। महिलाओं ने व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा कर पति और परिवार के सुखमय जीवन की कामना की। गया शहर के कई स्थानों परबरगद वृक्ष के पास सुबह से ही काफी भीड़ देखी गई।
पूजन का सिलसिला अहले सुबह से ही शुरू हो गया था। फल्गु नदी, सूर्यकुंड, रामसागर तालाब आदि विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने स्नान करने के सोलह श्रृंगार कर बरगद के पेड़ के नीचे वट सावित्री व्रत की पूजा की। इसके अलावा घरों और शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजन के लिए काफी भीड़ देखी गई। सिंदूर, बिंदी, रोली, रक्षा और अन्य सौंदर्य प्रसाधान की सामग्री का दान किया गया।
ऐसा माना जाता है कि पवित्र बरगद पेड़ के नीचे पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस तरह सावित्री ने अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लायीं थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गुरुवार को वट सावित्री व्रत है ।इस दिन महिलाएं सुबह से ही देवी सावित्री की भी पूजा कर उनकी कथा सुनकर भोग लगाकर अपने व्रत का पारण किया । नई नवेली दुल्हन में इस व्रत को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान मंदिरो में पूजा करने वाले भक्तो की भीड़ दिखाई दी।
ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र बरगद पेड़ के नीचे पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस तरह सावित्री ने अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लायीं थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गुरुवार को वट सावित्री व्रत था। इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद, विवाहित महिलाएं दुल्हन के रूप में तैयार होकर अपने माथे पर सिंदूर लगाया। देवी सावित्री की भी पूजा कर उनकी कथा सुनकर भोग लगाकर अपने व्रत का पारण किया ।




















































