फाइलेरिया मुक्त समाज से सुरक्षित होगा भविष्य, इसके लिए 10 अगस्त से जिले में चलेगा सर्वजन दवा सेवन (एमडीए/आईडीए) अभियान

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-घर-घर पहुंचकर सभी स्वस्थ व्यक्ति को खिलाई जाएगी दवा
-लगातार पांच साल खाने से कभी नहीं होगी फाइलेरिया
-फाइलेरिया ग्रसित मरीजों द्वारा दवा सेवन के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक

पूर्णिया, 03 अगस्त

फाइलेरिया गंभीर बीमारी है। समाज के उत्थान और उन्नति के लिए फाइलेरिया मुक्त होना बहुत जरूरी है। फाइलेरिया मुक्त समाज से ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। भविष्य के समृद्ध युवा पौध को तैयार करने के लिए मौजूदा बच्चों की पीढ़ी को फाइलेरिया के संक्रमण से बचाना होगा। यह समाज के शारीरिक और आर्थिक उत्थान के लिए भी बेहद जरूरी है। मालूम हो कि देश में अपंगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण फाइलेरिया है। यह जितनी जटिल बीमारी है,उतना ही सरल इसका निदान भी। सर्वजन दवा सेवन (एमडीए/आईडीए) अभियान के तहत फाइलेरिया रोधी दवाओं का लगातार पांच साल इस्तेमाल और बीमारी से मुक्ति। इसके लिए सभी को तत्पर रहना होगा और फाइलेरिया मुक्त समाज में अपनी सहभागिता निभानी होगी जिसकी शुरुआत पूर्णिया जिले के सभी प्रखंडों में 10 अगस्त से हो रही है। 10 अगस्त से चलने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए/आईडीए) अभियान के तहत लोगों को खुद भी फाइलेरिया रोधी दवा खानी है और अपने परिजनों के साथ साथ आस-पड़ोस के लोगों को भी इसके उपयोग के लिए समझानी है जिससे कि 02 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों द्वारा दवा का सेवन करते हुए खुद को फाइलेरिया बीमारी से सुरक्षित रख सकें।

घर-घर पहुँचकर सभी स्वस्थ व्यक्ति को खिलाई जाएगी दवा :

एमडीए/आईडीए अभियान के दौरान दी जाने वाली फाइलेरिया रोधी दवाएं फाइलेरिया बीमारी की नहीं बल्कि इससे बचाव की दवा है। इसे हर स्वस्थ व्यक्ति को खाना चाहिए। इसके लिए स्थानीय आशा कर्मियों या आंगनवाड़ी सेविकाओं द्वारा लोगों को घर-घर पहुँचकर दवा खिलाई जाएगी। फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य कर्मी द्वारा 02 वर्ष से 05 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाई जाएगी तथा 05 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को एल्बेंडाजोल और डीईसी के साथ साथ आइवरमेक्टिन की भी गोली खिलाई जाएगी। सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उम्र और लंबाई के अनुसार दवाई दिया जाएगा ताकि उम्र के अनुसार उनका डोज सम्पूर्ण हो सके। आइवरमेक्टिन की गोली (आईडीए) खिलाने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को फीता उपलब्ध कराई गई है जिसमें तुलना करने के बाद संबंधित व्यक्ति को आइवरमेक्टिन कि गोली खिलाई जाएगी।

लगातार पांच साल खाने से कभी नहीं होगी फाइलेरिया :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि फाइलेरिया होने पर लोगों को इसकी जानकारी 05 से 10 साल बाद बता चलता है जब उनका हाथ-पैर या पुरुषों के हाइड्रोसील और महिलाओं के स्तन में सूजन होने लगता है। समय के साथ साथ सूजन बढ़ने लगता है। हाइड्रोसील में होने वाले सूजन को नजदीकी सरकारी अस्पताल में सूचित करने पर योग्य चिकित्सकों द्वारा उसका ऑपरेशन करते हुए फाइलेरिया से सुरक्षित किया जा सकता है लेकिन हाथ-पैर और महिलाओं के स्तन में सूजन होने पर उसका सम्पूर्ण इलाज नहीं हो सकता। इससे सुरक्षित रहने के लिए लोगों को स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी द्वारा एमडीए/आईडीए कार्यक्रम के दौरान साल में एक बार घर-घर पहुँचकर खिलाये जाने वाले दवा का सेवन स्वास्थ्य कर्मी के सामने ही करना चाहिए। सभी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा लगातार पांच साल तक साल में एक बार इसका सेवन करने से वे फाइलेरिया से सुरक्षित रह सकते हैं। दवाई सेवन करने से अगर उनके शरीर के अंदर फाइलेरिया की कीटाणु उपलब्ध हैं तो वह नष्ट हो जाते हैं। इसलिए 02 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को (गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार लोगों को छोड़कर) इसका सेवन करना चाहिए और खुद को फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित करना चाहिए।

फाइलेरिया ग्रसित मरीजों द्वारा दवा सेवन के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक :

ज्यादा से ज्यादा लोगों द्वारा दवाई का सेवन किया जा सके इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों के साथ साथ फाइलेरिया से ग्रसित लोगों द्वारा भी आसपास के लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले के तीन प्रखंड पूर्णिया पूर्व, के.नगर और कसबा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन के लिए पेशेंट सपोर्ट ग्रुप का संचालन किया जा रहा है। इसमें संबंधित क्षेत्र के फाइलेरिया ग्रसित मरीज उपलब्ध है जिन्हें समय समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनके स्वास्थ की जानकारी प्राप्त करते हुए आवश्यकतानुसार उन्हें मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सामान्य लोगों को उनकी तरह फाइलेरिया की बीमारी नहीं हो इसके लिए संबंधित क्षेत्र में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के फाइलेरिया ग्रसित मरीजों द्वारा लोगों को दवा सेवन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है जिससे कि कोई भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित नहीं हो सके और फाइलेरिया होने से सुरक्षित रह सके।

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