चेहरा तो उम्र के साथ बदल जाता है लेकिन संस्कार और स्वभाव हमेशा याद रह जाते है.. पढ़िए आज की सुविचार संपादक की कलम से ।

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आरके राय चंद्रकांता न्यूज़ : सही मौके पर खड़े होकर बोलना एक साहस है उसी प्रकार खामोशी से बैठकर दूसरों को सुनना भी एक साहस है अहंकार तभी उत्पन्न होता है,जब गुणों का स्वामी यह भूल जाता है कि प्रशंसा वास्तव में उसकी नहीं,बल्कि उसके गुणों की हो रही है मनुष्य समय को योजनाबद्ध करके,सफलता पा सकता है उसी प्रकार विचार:- प्रवाह को भी,सुनियोजित कर के लक्ष्य विशेष से जोड़कर लाभान्वित हुआ जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं कि सेब में अच्छी ताकत होती है लेकिन कोई सेब का व्यापारी कहे कि हम तो सेब बेचते है हमारे में बहुत ताकत है तो उसकी बेवकूफी होगी क्योंकि सेब खाने से ताकत मिलेगी सेब बेचने से नहीं ठीक इसी प्रकार से अगर कोई गीता,रामायण पढ़कर सुनाने वाला यह कहे कि मैं तो बड़ा ज्ञानी हूं मैंने तो बहुत गीता रामायण पढ़ी है तो वह मूर्ख ही होगा क्योंकि जब तक गीता, रामायण की बातों को अपने आचरण में नहीं उतारा तब तक किस बात का ज्ञान ? हर कदम यदि ईश्वर के साथ उठाए तो हर कदम में सौभाग्य समाया होगा “कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन” एक भगवद गीता का श्लोक है,जिसका अर्थ है कि आपका अधिकार केवल कर्म करने में है,न कि उसके फल में यह कर्म के फल की इच्छा किए बिना अपने कर्तव्यों को पूरा करने के महत्व पर जोर देता है इंसान की असली पहचान उसके चेहरे से नहीं बल्कि उसके शब्दों और व्यवहार से होती है चेहरा तो उम्र के साथ बदल जाता है लेकिन संस्कार और स्वभाव हमेशा याद रह जाते है क्रोध उस आग की तरह है,जिसमें सबसे पहले इंसान खुद जलता है और फिर अपने आसपास के लोगों को भी जला देता है धैर्य और शांति ही इस जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।

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