मधुबनी:
जामुनों की जैसे बाढ़ आ गई है। जिन पेड़ों पर पिछले साल गिने-चुने फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुनों से लदे हैं। जिन पेड़ों पर फल आए थे, वहाँ तो जामुनों का ढेर लग गया है।
ये आखिर हो क्या रहा है?हमारी दादी बस यही कहती थीं कि “जिस गर्मी में जामुनों का ऐसा ढेर लगता है, उस साल सूखा पड़ता है”। दादी का ये पारंपरिक ज्ञान वनस्पति विज्ञान के हिसाब से बिल्कुल सही और सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को “मास्टिंग” या “स्ट्रेस फ्रूटिंग” कहा जाता है। पेड़ों द्वारा खुद को झोंककर ज्यादा से ज्यादा फल देने की इस आखिरी कोशिश को कभी-कभी “सुसाइड फ्रूटिंग” या “बंपर क्रॉप” भी कहते हैं।
ये आखिर है क्या और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है, इसे आसान भाषा में समझते हैं:
- ‘सर्वाइवल इंस्टिंक्ट’ – अस्तित्व की लड़ाई
जैसा प्रोफेसर मैडम ने बताया, ये प्रकृति का “अपने जीन आगे बढ़ाने का” नियम है। जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होने लगती है या मौसम में बड़े बदलावों के संकेत मिलते हैं, तो पेड़ “डिफेंस मोड” में चला जाता है। पेड़ को आभास हो जाता है कि शायद वो आगे जी न पाए। ऐसे समय में खुद को बचाने के बजाय, अपनी प्रजाति को धरती पर बनाए रखने के लिए पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा “बीज” यानी फल बनाने में लगा देता है। - नई पत्तियों-डालियों पर रोक
ऐसे साल में पेड़ नई पत्तियाँ फूटना या डालियाँ बढ़ाना पूरी तरह रोक देता है। क्योंकि नई पत्तियों को जिंदा रखने के लिए ज्यादा पानी और पोषण चाहिए। पेड़ वो ऊर्जा बचाकर सिर्फ और सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाने पर लगाता है। इसी वजह से पिछले साल जिन पेड़ों पर थोड़े-बहुत फल थे, वे भी इस साल फलों से भर गए हैं। - दादी की भविष्यवाणी और विज्ञान – सूखे से संबंध
दादी का अवलोकन बिल्कुल सटीक है, क्योंकि पेड़-पौधे मौसम में बदलाव को इंसानों से कहीं पहले और ज्यादा संवेदनशीलता से पहचानते हैं।
जामुन की जड़ “तप जड़” होती है, जो जमीन की काफी गहराई तक जाती है।जब भूजल का स्तर बहुत ज्यादा नीचे चला जाता है, तभी इन जड़ों को तनाव महसूस होता है।यही पानी का तनाव आने वाले सूखे या कड़ी गर्मी का संकेत होता है इसलिए, जिस साल गर्मी में जामुनों का ऐसा अभूतपूर्व ढेर लगता है, वो प्रकृति की तरफ से आने वाले सूखे समय की चेतावनी होती है।
संक्षेप में कहें तो…
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि अपना बलिदान देकर अपनी अगली पीढ़ी यानी बीजों को जन्म देने की कोशिश कर रहा है। प्रकृति का ये चक्र वाकई हैरान करने वाला है। दादी का पीढ़ियों पुराना अवलोकन और विज्ञान के सिद्धांत यहाँ बिल्कुल मिल जाते हैं।
इस साल जामुन का स्वाद जरूर लें, लेकिन प्रकृति के इस “सूखे” के संकेत को गंभीरता से लें और पानी व संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, यही इससे समझ आता है l























































