दलित आर्थिक अधिकार आन्दोलन के तत्वाधान में बिहार बजट 2021 -22 को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित

1050

नवादा से अनिल शर्मा की रिपोर्ट
नवादा : दलित आर्थिक अधिकार आन्दोलन के तत्वाधान में बिहार बजट 2021 -22 को लेकर नगर के अम्बेडकर भवन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें साथ पैनल टीम ने बजट का विश्लेषण कर बताया की क्या है इस बार बिहार बजट 2021 -22 में। वर्ष 2020 हम सबके लिए उथल पुथल भरा रहा है । खासकर सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के लिए तो बहुत ही मुश्किल भरा था । वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रकोप का असर सभी पर पड़ा हालाँकि विभिन्न सनुदयों ने इसे अलग -अलग रूप में अनुभव किया। ऐसा लगा की भारत की जाति एवं वर्ग वैश्विक हो गया। जीवन में एक के बाद एक घटने वाली श्रृंखलाओं का पूरा देश गवाह था। इसने प्रवासी कामगारों के रोजगार की रीढ़ तोड़ दी, कोविड-19 के दौरान भी स्वच्छकार सफाई का कार्य करते रहे और हिंसा बे-रोकटोक जारी रही ।
कोविड-19 की पृष्भूमि में वित् मंत्री ने बजट पेश किया, जिससे लोग अभूतपूर्व अपेक्षाएं कर रहे थे की इस बार बजट में क्या होगा । यदि दलित और आदिवासी दृष्टिकोण से देखा जाय तो इस बजट की चमक कम रही ।

राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान के राज्य समन्वयक धर्मदेव पासवान ने बताया कि सोमबार को अनुमानित बजट 2,18,303.00 करोड़ रुपयों का था जिसमें से अनुसूचित जाति के लिए 16,777.74 करोड़ रूपये आवंटित किये गए और अनुसूचित जनजाति के लिए 1,550.15 करोड़ रूपया।
जब दलित आदिवासी छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में पढने के लिए आते हैं तो बुरी तरह भेदभाव के शिकार होतें हैं । क्योंकि इन शिक्षण संस्थानों को चलाने वाले दबंग जाति के होते हैं और दलित आदिवासी समुदायों के छात्रों की सामाजिक -आर्थिक पृष्भूमि कमजोर होती है।
पोस्ट मैट्रिक स्कौलरशिप केंद्र द्वारा प्रायोजित स्कीम है जिसका कार्यान्वयन राज्य सरकारों और केंद शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है । इस स्कीम से अनुसूचित जाति के छात्रों आर्थिक सहायता मिलती है, जब वे अपनी दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं । पोस्ट मैट्रिक स्कौलरशिप देश की एक बड़ी योजना है, और दलित तथा आदिवासी समुदायों के बच्चो के लिए लाईफ लाईन की तरह है।
बिहार सरकार ने बिहार के दलित/आदिवासी बेरोजगार युबाओं के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के लिए 85 करोड़ और जनजाति के लिए 5 करोड़ दिया है जो अप्रयाप्त है | उद्योग विभाग के अंतर्गत इस बजट में अनु० जाति के उद्यमी बनाने के लिए 92 करोड़ 90 लाख और अनु० जनजाति के लिए 5 करोड़ 80 लाख आवंटित हुआ है जो टार्गेट के हिसाब से काफी कम है उसी हेड में समान्य स्कीम के तहत महिला उधमी योजना सात निश्चय-2 के तहत 97 करोड़ 55 लाख आवंटित किया गया है जबकि अगर हम जनसँख्या की बात करे तो इसके मुकाबले एससी / एसटी के लिए जो उधमी बनने हेतु बजट का प्रावधान किया गया है वो काफी कम है ।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पैनल टीम में सामाजिक कार्यकर्त्ता शाहिल कुमार, योगेश पासवान, मनोज कुमार, गोपी रविदास, बिश्नुदेव पासवान, आरती देवी, प्रीतम कुमारी, रामविलास पासवान, ललिता देवी, रुकमनी देवी, राधा देवी, डी ए ए ए से सिंकू कुमारी, चन्दन चौधरी, सुमन चौधरी, रंजय अम्बेडकर, इत्यादि शामिल हुए । इस दरम्यान छात्रों से संबंधित 12 सूत्री मांगों को रखा गया ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here