देश के 187 सांसदों/विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस, कई पर दुष्कर्म के आरोप

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प्रदीप कुमार नायक
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
भारत की राजनीति में दागदार नेताओं का बोलबाला किसी से छिपा नहीं है। इसके बावजूद ऐसे नेता अपने रसूख के दम पर चुनाव जीतकर संसद और विधानसभाओं में पहुंच जाते हैं। इस गंभीर मुद्दे पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मौजूदा 187 सांसदों और विधायकों ने अपने चुनावी हलफनामों में महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े केस दर्ज होने की जानकारी खुद घोषित की है।
रिपोर्ट का आधार क्या है?
यह डेटा भारत के चुनाव आयोग (ECI) के पास जमा किए गए हलफनामों (फॉर्म 26) से लिया गया है। ADR और NEW ने पिछले 5 वर्षों में 2022 से 2026 के बीच हुए चुनावों के 4899 हलफनामों में से 4881 का विश्लेषण किया है।
इसमें मौजूदा 772 सांसदों में से 772 और 4123 विधायकों में से 4109 के हलफनामों का विश्लेषण शामिल है। इसमें इस्तीफा, निधन या अन्य कारणों से खाली हुई सीटों पर हुए उपचुनावों के हलफनामे भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों की मौजूदा कानूनी स्थिति अलग हो सकती है, यह मामले-दर-मामले निर्भर करता है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ाते हैं। NCRB के मुताबिक, भारत में साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 केस दर्ज हुए, यानी हर दिन औसतन 1,210 केस। दिल्ली और तेलंगाना में अपराध दर राष्ट्रीय औसत 64.6 केस प्रति लाख महिलाओं से लगभग दोगुनी दर्ज की गई।
187 में कौन हैं?
जिन 772 सांसदों और 4109 विधायकों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 187 ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस बताए हैं। इन 187 में से 19 सांसद और 168 विधायक हैं।
दुष्कर्म के 14 गंभीर केस
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन 187 में से 14 मौजूदा MP/MLA ने दुष्कर्म (IPC की धारा-376) और एक ही महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म (IPC की धारा-376(2)(n)) से जुड़े केस दर्ज होने की घोषणा की है।
इन 14 में से 2 लोकसभा सांसद और 12 विधायक हैं।
राज्य-वार देखें तो पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 3 ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिन पर दुष्कर्म के केस हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 2 केस हैं। बाकी आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, केरल, तेलंगाना, गोवा और मेघालय में एक-एक केस है।
पार्टी-वार देखें तो BJP और कांग्रेस (INC) के पास ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक है, दोनों दलों के पास 4-4 ऐसे दागी नेता हैं। सिर्फ BJP के पास दुष्कर्म केस घोषित करने वाले 2 मौजूदा सांसद हैं, बाकी सभी पार्टियों के केस विधायकों के हैं। कुल 14 में से 8 केस अकेले BJP और कांग्रेस के पास हैं। TDP, तृणमूल कांग्रेस, BJD, NPP, भारत आदिवासी पार्टी और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट में से हर एक के पास 1-1 विधायक ऐसा है।
पार्टी-वार आंकड़ा (महिलाओं के खिलाफ अपराध)

  • BJP — 106 सांसद/विधायक
  • कांग्रेस — 20 सांसद/विधायक
  • TDP — 18 सांसद/विधायक
    राज्य-वार आंकड़ा (कुल 187 दागी MP/MLA)
    राज्य कुल दागी
    पश्चिम बंगाल 69 (63 विधायक, 4 लोकसभा, 2 राज्यसभा)
    आंध्र प्रदेश 22
    ओडिशा 17
    महाराष्ट्र 11
    बिहार 10 (9 विधायक, 1 लोकसभा)
    कर्नाटक 7
    झारखंड 6
    केरल, म.प्र., राजस्थान, तेलंगाना 5-5
    उत्तर प्रदेश 4
    अन्य छोटे राज्य 1-3
    बिहार में भी 10 ऐसे जनप्रतिनिधियों के सामने आने के बाद मधुबनी सहित पूरे राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
    निष्कर्ष: यह आंकड़े स्व-घोषित हलफनामों पर आधारित हैं। यह केवल वे मामले हैं जहाँ जनप्रतिनिधियों ने खुद स्वीकार किया है कि उन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े केस दर्ज हैं।
    [10/27, 8:52 PM] chandrakanta2008rk: ,

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