अमरदीप नारायण प्रसाद
विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर राज्य स्तर तक पहुँचाने वाले शिक्षक की प्रेरणादायी यात्रा
समस्तीपुर।
शिक्षा केवल पुस्तकों के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिज्ञासा को दिशा देने, प्रतिभा को पहचानने, सपनों को पंख देने और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने की सतत प्रक्रिया है। इसी विचार को अपने शिक्षकीय जीवन का आधार बनाकर शिक्षा, विज्ञान, नवाचार और डिजिटल शिक्षण के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य करने वाले श्री मनीष चन्द्र प्रसाद आज समस्तीपुर जिले के लिए एक प्रेरणादायी शिक्षक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
वर्तमान में वे उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय रसलपुर, प्रखंड–सरायरंजन, जिला–समस्तीपुर में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित होकर उन्होंने 21 जुलाई 2025 को प्रधानाध्यापक के रूप में योगदान दिया। प्रधानाध्यापक के रूप में उनका सतत प्रयास विद्यालय को ऐसा जीवंत शिक्षण केंद्र बनाने का है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विज्ञान, नवाचार, तकनीक, रचनात्मकता, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्र निर्माण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा बनें।
समर्पण से नेतृत्व तक की गौरवपूर्ण यात्रा
श्री मनीष चन्द्र प्रसाद ने 06 अगस्त 2013 को माध्यमिक विज्ञान शिक्षक के रूप में अपनी शिक्षकीय यात्रा प्रारंभ की। 15 फरवरी 2024 तक उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय खोड़ि, समस्तीपुर में कार्य करते हुए उन्होंने विज्ञान शिक्षण को गतिविधि आधारित, छात्र-केंद्रित एवं प्रयोगात्मक बनाने का निरंतर प्रयास किया।
इसके पश्चात 16 फरवरी 2024 से 20 जुलाई 2025 तक उच्च माध्यमिक विद्यालय गंगसारा, प्रखंड–सरायरंजन में जीवविज्ञान के उच्च माध्यमिक शिक्षक के रूप में कार्य किया। इस दौरान विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की प्रवृत्ति, प्रयोगात्मक अधिगम तथा नवाचार की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
आज प्रधानाध्यापक के रूप में वे शैक्षणिक नेतृत्व, सुशासन, अनुशासन, डिजिटल शिक्षा, नवाचार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को विद्यालय की कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
प्रेरणा से नवाचार तक—चार विद्यार्थियों का राज्य स्तर पर चयन
श्री मनीष चन्द्र प्रसाद की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में इंस्पायर मानक कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करना शामिल है।
उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के—
रौशन कुमार – 2019
नितीश कुमार – 2020
शिवानी कुमारी – 2021
राजवर्धन कुमार – 2025
का राज्य स्तर के लिए चयन हुआ।
लगातार विभिन्न वर्षों में विद्यार्थियों का राज्य स्तर तक पहुँचना उनके मार्गदर्शन, वैज्ञानिक सोच तथा नवाचार आधारित शिक्षण की प्रभावशीलता को प्रमाणित करता है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण एवं सामान्य पृष्ठभूमि के विद्यार्थी भी अपनी प्रतिभा के बल पर बड़े मंचों तक पहुँच सकते हैं।
वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित शिक्षा के लिए विशेष पहचान
वर्ष 2023-24 में आयोजित 51वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में उन्होंने मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में सहभागिता की।
वर्ष 2022 में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना एवं भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक विकास कार्यशाला में सहभागिता की। इसके बाद वर्ष 2023 में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे में आयोजित 10 दिवसीय शिक्षक विकास कार्यशाला में भाग लिया तथा नवाचार चैंपियन के रूप में चयनित हुए।
वर्ष 2025 में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, पटना एवं भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों के माध्यमिक गणित एवं विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण देने में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
सम्मानों की लंबी सूची में जुड़ी उपलब्धियों की अनेक कड़ियाँ
शिक्षा एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े उनके कार्यों को समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर सम्मान प्राप्त हुआ है।
वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल की वेलरेड फाउंडेशन द्वारा उन्हें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रीय शिक्षाविद् सम्मान से सम्मानित किया गया।
इसी वर्ष भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे द्वारा विद्यालय में इंस्पायर मानक कार्यक्रम को बढ़ावा देने, कक्षा-कक्षीय सहभागिता तथा नवाचारपूर्ण शिक्षण-अधिगम सामग्री के निर्माण के लिए उन्हें राज्य स्तरीय आईराइज सम्मान–2024 प्रदान किया गया।
वर्ष 2023 में उन्नयन स्मार्ट कक्षा के प्रभावी संचालन एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिलाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
वर्ष 2025 में अनुमंडल शिक्षक सम्मान समारोह में अनुमंडल पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा उन्हें प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त बिहार दिवस, युवा उत्सव, कला उत्सव, जिला स्तरीय प्रश्नोत्तरी एवं अन्य शैक्षणिक-सांस्कृतिक आयोजनों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भी उन्हें विभिन्न अवसरों पर प्रशस्ति-पत्र प्राप्त हुए हैं।
हाल ही में “द बिहार टीचर्स–हिस्ट्री मेकर्स” द्वारा भी शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान एवं “मेरा मोबाइल–मेरी शिक्षा” अभियान के सफल संचालन के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार विद्यार्थी की सफलता
मनीष चन्द्र प्रसाद का स्पष्ट मानना है कि किसी शिक्षक की वास्तविक सफलता उसके नाम के आगे लगे पद या सम्मान से नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन से मापी जानी चाहिए।
उनका कहना है—
“एक शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान नहीं देता, वह विद्यार्थियों को सोचने, प्रश्न करने, प्रयोग करने और अपने सपनों को साकार करने का साहस देता है। मेरे लिए विद्यार्थी की सफलता ही सबसे बड़ा सम्मान है।”
उनकी कार्यशैली में सूचना एवं संचार तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षण संसाधन, परियोजना आधारित अधिगम तथा गतिविधि आधारित शिक्षण का प्रभावी समावेश दिखाई देता है।
विद्यालय को बना रहे हैं नवाचार और उत्कृष्टता का केंद्र
प्रधानाध्यापक के रूप में उनका प्रयास है कि उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय रसलपुर केवल परीक्षा परिणाम देने वाला विद्यालय न होकर ऐसा संस्थान बने, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने का अवसर मिले।
विद्यालय में वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रश्न पूछने की संस्कृति, प्रयोगात्मक अधिगम, नवाचार, डिजिटल साक्षरता, पर्यावरण चेतना, रचनात्मक गतिविधियों तथा नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं समुदाय के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।
“जहाँ शिक्षक की सोच में नवाचार होता है, वहाँ विद्यार्थियों के सपनों को पंख मिलते हैं; और जहाँ सपनों को पंख मिलते हैं, वहीं से राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की उड़ान शुरू होती है।”
शिक्षक दिवस के अवसर पर श्री मनीष चन्द्र प्रसाद की यह यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण और उपलब्धियों की कहानी है, बल्कि उन हजारों शिक्षकों के लिए प्रेरणा भी है जो सीमित संसाधनों के बीच भी ज्ञान, नवाचार और समर्पण के माध्यम से विद्यार्थियों का भविष्य बदलने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं।




















































