वट वृक्ष पूजा और सूर्य ग्रहण साथ 10 जून को 2021 का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा

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अमरदीप नारायण प्रसाद

यह सूर्य ग्रहण हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को लगेगा। खास बात यह है कि इस दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती भी है। ग्रहण का ज्योतिषीय व वैज्ञानिक महत्व भी है। तंत्र साधना और मंत्र सिद्धि के लिए यह दिन विशेष है किंतु कोई भी मंत्र सिद्ध करने के लिए गुरु के निर्देश की आवश्यकता होती है तो गुरु के निर्देश द्वारा उचित रूप अगर मंत्र सिद्ध किया जाए तो निश्चित रूप में सफलता प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं। जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण योग क्या होता है? जब कुंडली में सूर्य के साथ राहु विराजमान हो तब उस भाव में ग्रहण योग बन जाता है और उस भाव के सभी शुभ फलों में न्यूनता आ जाती है। जिनकी कुंडली में ग्रहण योग होता है उनके जीवन में आगे बढ़ने में बहुत समस्या आती है बहुत प्रयास करने पर भी जीवन में उन्नति का मार्ग दिख नहीं पाता सूर्य ग्रहण योग एक ऐसा योग है जो पित्र दोष को भी इंगित करता है।ग्रहण काल दौरान पूजा-पाठ आदि की भी मनाही होती है। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।10 जून 2021, दिन गुरुवार को सूर्य ग्रहण दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा, जोकि शाम 06 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा।यह सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग, यूरोप और एशिया में आंशिक तौर पर दिखेगा। इसके अलावा इसे उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में पूर्ण रूप से देखा जा सकेगा। अगर भारत की बात करें तो इसे आंशिक तौर पर ही देखा जा सकेगा।सूर्य ग्रहण का सबसे ज्यादा असर वृषभ राशि पर देखने को मिलेगा। इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा। ऐसे में इस राशि के जातकों को अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा। इसके अलावा पैसों के मामलों में सावधानी बरतनी होगी। सूर्य ग्रहण के दौरान मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रहण दोष है या जिनकी कुंडली में सूर्य की महादशा में राहु का अंतर है या राहु की महादशा में सूर्य का अंतर है उनके लिए यह ग्रहण भारी रहेगा। क्योंकि यह ग्रहण शनि जयंती के दिन लगा है तो इसका प्रभाव और भी ज्यादा पड़ेगा।
उचित उपाय से समस्या का समाधान निश्चित है।

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