•अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने पीड़ित परिवारों को प्रदान की आर्थिक सहायता
•संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाना निंदनीय
•मृतकों के परिजनों को राहत स्वरूप प्रति परिवार 4 लाख 12 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई
पटना। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के माननीय मंत्री श्री लखेंद्र पासवान ने नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र में हुई भीड़ हिंसा की घटना को कानून व्यवस्था और मानवता के विरुद्ध गंभीर अपराध बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाना और कानून को अपने हाथ में लेना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
ज्ञात हो कि 15 जून को राजगीर थाना क्षेत्र अंतर्गत झुनकिया बाबा मंदिर के समीप चोरी के संदेह में दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपर गांव निवासी पिंटू पासवान (24 वर्ष) एवं श्रवण पासवान (18 वर्ष) पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने संज्ञान लिया। मामले को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। विभागीय प्रावधानों के तहत मृतकों के परिजनों को राहत स्वरूप प्रथम किश्त के रूप में प्रति परिवार 4 लाख 12 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। शुक्रवार को माननीय मंत्री श्री लखेंद्र पासवान ने स्वयं पीड़ित परिवारों को चेक सौंपा।
इस अवसर पर माननीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
श्री पासवान ने कहा कि भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित कर दंडित करने की प्रवृत्ति कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती है। किसी भी अपराध की जांच और दोष निर्धारण का अधिकार केवल कानून और न्यायिक व्यवस्था को है। ऐसे जघन्य कृत्य सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत हैं।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस और प्रशासन को सूचित करें। राज्य सरकार ऐसी घटनाओं के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।




















































