जीवन में एक बात हमेशा स्मरण रखे कि सिद्धांतों पर चलकर हारना, झूठ के दम पर जीतने से कई गुना बेहतर है जीवन में हार-जीत से भी कोई ज्यादा महत्वपूर्ण वस्तु है तो वो है आपके सिद्धांत सिद्धांत अर्थात सत्य का पथ,श्रेष्ठता का पथ और शास्त्रानुकूल पथ जितने भी हमारे महान पुरूष हुए हैं,उनकी महानता के पीछे बस एक ही कारण था कि उन्होंने जीतने के बजाय हारना स्वीकार किया मगर अपने सिद्धांतों का परित्याग कभी भी नहीं किया सत्य का पथ सुगम तो नहीं होता मगर श्रेष्ठ जरूर होता है पग-पग में आपकी परीक्षाएं होंगी,कदम-कदम पर आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा,अनेक मुश्किलों से आपको गुजरना पड़ेगा,अनेक अटकलों से आपको जूझना पड़ेगा फिर एक समय बाद वो स्थिति भी अवश्य आयेगी जब दूसरे लोगों के लिए आपका जीवन एक आदर्श,एक उदाहरण होगा निश्चित समझे अगर आप सिद्धांतवादी हैं तो जीत से भी ज्यादा चर्चे तो आपकी हार के होंगे सच्चाई के इस जंग में,कभी झूठे भी जीत जाते है समय अपना अच्छा न हो तो कभी अपने भी रूठ जाते है कच्चे मकान देखकर किसी से रिश्ता ना तोडे क्योंकि मिट्टी की पकड बहुत मजबूत होती है और,संगमरमर पर तो अक्सर पैर फिसल जाते हैं दुनिया की कोई भी चीज इतनी जल्दी नहीं बदलती जितनी जल्दी इंसान की नियत और नजरे बदलती है जिंदगी में कभी कभी कुछ रिश्तों का टूट जाना भी जरूरी होता है,कई बार विश्वास का टूट जाना भी जरूरी होता है क्योंकि दुबारा विश्वास करने और लोगों को समझने के लिए और कभी कभी कुछ अपनों से भी दूर हो जाना भी जरूरी होता है क्योंकि अपनों से दूर होने का दर्द समझने के लिये और आपके अपने स्वयं का टूटना भी बहुत जरूरी होता है क्योंकि टूटकर फिर से स्वंय का पहचानने वा खुद को आप पाने के लिये जरूरी होता है इंसान अपना घमण्ड अपने अच्छे वक़्त में दिखाता है लेकिन उसका अंजाम उसके बुरे वक़्त में दिखता है।























































