#मांगों पर अविलंब वार्ता नहीं हुई तो बिहार विधानसभा सत्र के दौरान आंदोलन करेगा राष्ट्रीय आपदा मित्र एसोसिएश
बिहार के प्रशिक्षित आपदा मित्रों एवं आपदा सखियों की ज्वलंत समस्याओं, नियमित रोजगार, सम्मानजनक मानदेय, लंबित बकाया भुगतान एवं सामाजिक सुरक्षा सहित 12 सूत्री मांगों को लेकर राष्ट्रीय आपदा मित्र एसोसिएशन, बिहार के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को पटना स्थित पटेल भवन कार्यालय में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री दीपक कुमार एवं बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। कार्यालय की ओर से ज्ञापन की विधिवत रिसीविंग भी प्रदान की गई।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रौशन कुमार ने किया। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री संजय सुमन, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रंजन कुमार, राज्य सचिव धीरज कुमार, सिवान जिला अध्यक्ष गुड्डू कुमार, प्रमोद कुमार सहवाल, शैलेश कुमार एवं रविंद्र कुमार यादव प्रमुख रूप से शामिल थे।
ज्ञापन में कहा गया है कि बिहार में बाढ़, अगलगी, सड़क दुर्घटना, डूबने की घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं एवं विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों के दौरान हजारों प्रशिक्षित आपदा मित्र अपनी जान जोखिम में डालकर प्रशासन और आम जनता की सहायता करते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित रोजगार, सम्मानजनक मानदेय, लंबित भुगतान, बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रशिक्षण एवं कार्य से संबंधित कई भुगतान भी लंबित हैं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं के सामने आर्थिक संकट और भविष्य की अनिश्चितता बनी हुई है।
एसोसिएशन की प्रमुख 12 सूत्री मांगें इस प्रकार हैं—
- बिहार के सभी प्रशिक्षित आपदा मित्रों एवं आपदा सखियों को सरकारी आपदा कर्मी का दर्जा देने के लिए ठोस नीतिगत निर्णय लिया जाए।
- सभी प्रशिक्षित आपदा मित्रों को पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर नियमित रोजगार और कार्य की गारंटी दी जाए।
- आपदा मित्रों को उनके कार्य एवं जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक मासिक मानदेय अथवा न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
- प्रशिक्षण अवधि सहित अब तक किए गए कार्यों का लंबित भुगतान निर्धारित दर के अनुसार अविलंब किया जाए।
- सभी आपदा मित्रों के लिए कम-से-कम 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा तथा 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा सुनिश्चित किया जाए।
- भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
- बाढ़, अगलगी, सड़क दुर्घटना, छठ एवं अन्य पर्व-त्योहारों में ड्यूटी के दौरान निर्धारित पारिश्रमिक एवं यात्रा भत्ता दिया जाए।
- सरकारी विद्यालयों में शनिवार को आयोजित सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम एवं अन्य आपदा जागरूकता अभियानों में कार्य करने वाले आपदा मित्रों को उचित पारिश्रमिक दिया जाए।
- सभी आपदा मित्रों को पहचान पत्र, निर्धारित यूनिफॉर्म, सुरक्षा किट, लाइफ जैकेट, हेलमेट, जूते तथा आधुनिक बचाव उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- ड्यूटी के दौरान किसी आपदा मित्र की मृत्यु या गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में उनके परिवार को उचित मुआवजा एवं परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की व्यवस्था की जाए।
- आपदा मित्रों के लिए नियमित पुनःप्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- बिहार के सभी जिलों में कार्यरत एवं प्रशिक्षित आपदा मित्रों का अद्यतन पंजीकरण कराकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यालय की ओर से प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया गया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों एवं समस्याओं पर वार्ता के लिए सूचना देकर संगठन के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा।
इस अवसर पर संगठन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रौशन कुमार ने कहा कि आपदा मित्र केवल स्वयंसेवक नहीं, बल्कि आपदा के समय समाज और प्रशासन के बीच जीवन रक्षक कड़ी हैं। बाढ़, अगलगी और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर वे लोगों की जिंदगी बचाने का काम करते हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य और आजीविका की अनदेखी की जा रही है। सरकार को उनकी जायज मांगों पर अविलंब सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सौंपे गए ज्ञापन पर अविलंब वार्ता नहीं होती है और आपदा मित्रों की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की जाती है, तो राष्ट्रीय आपदा मित्र एसोसिएशन, बिहार के नेतृत्व में बिहार विधानसभा के आगामी सत्र के दौरान आंदोलन किया जाएगा।
एसोसिएशन ने बिहार सरकार एवं बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मांग की कि 12 सूत्री मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर अविलंब सकारात्मक एवं ठोस नीतिगत निर्णय लिया जाए, ताकि बिहार के हजारों प्रशिक्षित आपदा मित्रों एवं आपदा सखियों का भविष्य सुरक्षित हो सके तथा उन्हें सम्मानजनक रोजगार, मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिल सके।






















































