अधर्म पर धर्म की विजय के त्यौहार ‘होलिका दहन..

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संबंध ओर जल दोनों एक समान होते है ना कोई रंग ना कोई रूप पर फिर भी जीवन के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण ।
रंगों के महापर्व होली की रंगीली शुभकामनाएं। ईश्वर आपके परिवार को हमेशा रंगबिरंगी खुशियां दे

होली एक कारण अनेक 🔹
🔸 कंस को जब आकाशवाणी द्वारा पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसका विनाशक होगा तो कंसने वसुदेव तथा देवकी को कारागार में डाल दिया। कारागार में जन्मे देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया।सातवें पुत्र शेषनाग के अवतार बलराम थे जिनके अंश को जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया था। आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या को अपने साथ ले आए। कंस उस कन्या को मार नहीं सका और आकाशवाणी हुई कि कंस को मारनेवाले ने तो गोकुल में जन्म ले लिया है। तब कंस ने उस दिन गोकुल में जन्मे सभी शिशुओं की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा। वह सुंदर नारी का रूप बनाकर शिशुओं को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन श्रीकृष्ण ने राक्षसी पूतना का वध कर दिया। यह फाल्गुन पूर्णिमा का दिन था। अत: बुराई के अंत की खुशी में होली मनाई जाने लगी।

🔸 होली का त्यौहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा है। बसंत में एक-दूसरे पर रंग डालना श्रीकृष्णलीला का ही अंग माना गया है। मथुरा-वृंदावन की होली राधा-कृष्ण के प्रेमरंग में डूबी होती है।
बरसाने और नंदगांव की लठमार होली जग प्रसिद्ध है।होली पर
होली जलाई जाती है….. अहंकार की…, अहं की…, वैर-द्वेष की…, ईर्ष्या की…, संशय की..
और प्राप्त किया जाता है…. विशुद्ध,निश्छल,निःस्वार्थ प्रेम

🔸 प्रह्लाद और होलिका का प्रसंग तो लगभग सभी लोग जानते हैं। माना जाता है कि होली पर्व का प्रारंभ प्रह्लाद और होलिका से जुड़ा है। दोनों की कथा विष्णु पुराण में उल्लिखित है। हिरण्यकश्यप ने तपस्या कर वरदान प्राप्त कर लिया। अब वह न तो पृथ्वी पर मर सकता था, न आकाश में, न दिन में, न रात में, न घर में, न बाहर, न अस्त्र से, न शस्त्र से, न मानव से, न पशु से। वरदान के बल से उसने देवताओं-मानव आदि लोकों को जीत लिया और विष्णु पूजा बंद करा दी, परन्तु पुत्र प्रह्लाद को नारायण की भक्ति से विमुख नहीं कर सका। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को बहुत यातनाएं दीं परन्तु उसने विष्णुभक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। अत: दैत्यराज ने होलिका को प्रह्लाद का अंत करने के लिए प्रह्लाद सहित आग में प्रवेश करा दिया परन्तु होलिका का वरदान निष्फल सिद्ध हुआ और वह स्वयं उस आग में जलकर मर गई।बस प्रह्लाद की इसी जीत की खुशी में होली का त्यौहार मनाया जाने लगा।

🔸पुराने समय में एक राजा हुए उनका नाम था राजापृथु।उनके समय में एक राक्षसी थी ढुंढी। वह नवजात शिशुओं को खा जाती थी। राक्षसी को वर प्राप्त था कि उसे कोई भी देवता, मानव, अस्त्र या शस्त्र नहीं मार सकेगा। न ही उस पर सर्दी, गर्मी और वर्षा का कोई असर होगा लेकिन शिव के एक श्राप के कारण बच्चों की शरारतों से मुक्त नहीं थी। राजा को ढुंढी को खत्म करने के लिए राजपुरोहित ने एक उपाय बताया कि यदि फाल्गुनमास की पूर्णिमा के दिन जब न अधिक सर्दी होगी और गर्मी, क्षेत्र के सभी बच्चे एक-एक लकड़ी एक जगह पर रखें और जलाए, मंत्र पढ़ें और अग्रिकी परिक्रमा करें तो राक्षसी मर जाएगी। हुआ भी ऐसा ही इतने बच्चे एक साथ देखकर राक्षसी ढुंढी अग्रि के नजदीक आई तो उसका मंत्रों के प्रभाव से वहीं विनाश हो गया।तब से इसी तरह मौज-मस्ती के साथ होली मनाई जाने लगी।

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