संजय भारती
पटना। संजीवनी आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, किदवाइपुरी,पटना में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर कर लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर कॉर्निया निकाला जा सकता है और यह प्रक्रिया नि:शुल्क होती है। आपके जाने के बाद भी आपकी आंखें इस खूबसूरत दुनिया को देख सकती। इसी पखवाड़े में नेत्रदान करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाना है। इसके बावजूद अभी भी नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता काफी कम है। हर वर्ष लक्ष्य की तुलना में 25 प्रतिशत लोग ही नेत्रदान के लिए अपनी इच्छा जताते हैं। लोगों को जागरूक करने की जरूरत है ताकि मृत्यु के बाद नेत्रदान हो सके और उस दान से दूसरे का जीवन में रोशनी आ सके। इसके अलावा पारिवारिक समस्या भी सामने आती है, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो परिवार के कुछ सदस्य नेत्रदान नहीं करवाना चाहते हैं, जिसे लेकर भी जागरूकता चलायी जा रही है। सिंह बताते हैं कि जिनकी मृत्यु आकस्मिक दुर्घटनाए हार्ट अटैक, लकवे से हुई हो या जिनकी मृत्यु ब्लड प्रेशर, मधुमेह, अस्थमा या हृदयरोग के कारण हुई है उनका कॉर्निया उत्तम माना जाता है। सेप्टीसीमिया, वायरल संक्रमण, जलकर, डूबकर, जहर खाकर,फांसी से, टीबी, क्रानिक बुखार, सिफलिस, एड्स से हुई मृत्यु के व्यक्ति का कॉर्निया प्रत्यारोपित नहीं किया जाता, इनका कोर्निया उपयोगी नहीं होता।
























































