अमरदीप नारायण प्रसाद
समस्तीपुर।सबसे पहले हम, बाल विवाह और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध को रोकनें के लिए असम सरकार को ज़मीनी स्तर पर निर्णायक कार्रवाई शुरु करनें के लिए बधाई देतें हैं, साथ हीं बिहार सरकार से भी अपनें सूबे में इस तरह की कार्रवाई करनें की मांग करतें हैं। इस कार्रवाई से राज्य में बाल विवाह की वजह से कम उम्र में गर्भधारण तथा मातृत्व, उच्च मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर जैसी गम्भीर समस्याओं पर नियंत्रण पाने में सक्षम होगी। इसकी तस्दीक नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (NHFS) के ताजा आंकड़े भी करतें हैं। इनके अनुसार देश में 20 से 24 साल उम्र की 23.3 फ़ीसदी ऐसी महिलाएं हैं जिनका बाल विवाह किया गया है। यह आंकड़े समस्या की गम्भीरता को दिखाते हैं। असम में यह संख्या राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। हम मांग करते हैं कि कम उम्र में होने वाले बाल विवाह को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा बिल्कुल मुफ्त किया जाए।
असम सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम नोबेल शांति पुरस्कार विजेता भाई कैलाश सत्यार्थी द्वारा भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए 16 अक्टूबर, 2022 को शुरू किए गए दुनियां के सबसे बड़े ग्रासरूट आंदोलन के हीं अनुरूप है। बाल विवाह जैसे सामाजिक सांस्कृतिक कुरीति के खिलाफ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में देश भर में दो करोड़ से ज्यादा लोगों नें हिस्सा लिया था। इस अभियान में
समस्तीपुर जिला में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के मार्गदर्शन और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के नेतृत्व में चेतना सामाजिक संस्था, प्रगति आदर्श सेवा केन्द्र, इडेन पब्लिक वेल्फेयर ट्रस्ट, अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन, आशा सेवा संस्थान, दलित चेतना विकास समिति, सूरजनारायण सेवा संस्थान, स्वर्णिम सामाजिक सेवा संस्थान, विवेक भारती समिति, एक्शन एड, युवा शौर्य, दूर देहात, संगिनी, यूनिक क्रियेटिव एजुकेशनल सोसायटी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर समाज कल्याण एवं शोध संस्थान, हंस ज्योति संस्थान, आप और हम, नेहरू युवा केन्द्र आदि तमाम स्वयंसेवी संगठनों, जीविका समूह की दीदीयों, आशा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों, अवकाश प्राप्त शिक्षकों, किसान मजदूर संगठन के प्रतिनिधियों, शिक्षक संगठनों की भागीदारी हुई तथा तमाम सामाजिक संगठनों, जीविका समूह नें अपनें अपनें इलाकों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का नेतृत्व किया। इस सामाजिक बदलाव के आन्दोलन का नेतृत्व देश के 500 ज़िलों के 10000 गांव की 70000 से अधिक महिलाओं नें किया था। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन/अभियान को 14 राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में समर्थन किया था।
बाल विवाह लड़की के मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों के लिए हानिकारक है। साथ हीं यह उसे शिक्षा से भी वंचित कर देता है। कई मामलों में तो, बाल विवाह के बाद कम उम्र में मां बननें से पैदा हुई जटिलताओं की वजह से भी जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो जाती है। लड़कियों के बचपन को बचाने, खुशहाल बचपन और सुयोग्य नागरिक बनानें के लिए भी बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर अविलम्ब रोक लगना चाहिए। इस कुप्रथा के अंत के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति की भी उतनीं हीं आवश्यकता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NHFS-V) के आंकड़ों के मुताबिक हमारे राज्य बिहार में जिनकी शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो गई हो ऐसी 20 से 24 आयुवर्ग की लड़कियों की मातृ मृत्यु दर करीब प्रति लाख 118 है। जबकि पहले से हीं मातृत्व धारण कर चुकीं या सर्वेक्षण के समय 40.8 फीसदी गर्भवती 15 से 19 आयुवर्ग की लड़कियों की मातृ मृत्यु दर 11 फीसदी है।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव-सह-कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के जिला समन्वयक सुरेन्द्र कुमार नें कहा कि “जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बाल विवाह, बाल मजदूरी, बाल यौन शोषण तथा बाल तस्करी एक सामाजिक कलंक है, प्रबुद्ध समाज के मुंह पर एक शर्मनाक तमाचा है जिसे समय रहते समाज से पूर्णतया समाप्त करनें की जरूरत है। यह कुप्रथा समाज में सैकड़ों साल से प्रचलन/अस्तित्व में है, इसे हमें हमारे आधुनिक समाज से तुरंत खत्म करनें की जरूरत है। हम हमारे राज्य के माननीय विद्वान मुख्यमंत्री से अनुरोध करतें हैं कि हमारे अपनें राज्य में इस कुप्रथा को बढ़ावा देने वाले दोषियों पर कानून सम्मत कठोर कार्रवाई करनें के लिए अपेक्षित पहल करें तथा विधायिका, कार्यपालिका स्तर पर संवेदनशीलता लाने हेतू जरूरी कदम उठाया जाए।”





















































