विकास की अवधारणा वंचित को संचित करने का उद्यम है : गुरु प्रकाश पासवान।

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संजय भारती

विकास की अवधारणा वंचित को संचित करने का उद्यम है। जब तक अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक अवसर, संसाधन और न्याय नहीं पहुँचता, तब तक विकास अधूरा रहेगा।” यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने पटना में सामाजिक संगठन पैरवी द्वारा आयोजित विमर्श “बिहार में विकास की जन-संकल्पना” में कही। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में बिहार विकास की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है और इसके लिए जरूरी है कि हम निरंतरता के साथ एक भविष्योन्मुखी और समावेशी राज्य का निर्माण करें। यह आयोजन आगामी विधानसभा चुनाव के आलोक में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नीति विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करने और एक सहभागी जन-घोषणा पत्र निर्माण की दिशा में पहल के रूप में हुआ। पैरवी संस्था के प्रमुख अजय झा ने कहा कि पिछली विधानसभा चुनावों में नागरिक समाज संगठनों ने जिन मुद्दों को रेखांकित किया था, वे आज भी कमोबेश मौजूद हैं। उन्होंने शासन और सरकार दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि सामाजिक संगठनों की भूमिका केवल आलोचना की नहीं, बल्कि नीति निर्माण में सहभागी बनने की होनी चाहिए। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभगियों का स्वागत करते हुए पैरवी के दीनबंधु वत्स ने कहा कि यह विमर्श राजनीतिक दलों को जनता की आकांक्षाओं से जोड़ने और सामाजिक संगठनों की प्राथमिकताओं को उनके एजेंडे में शामिल कराने का अवसर है। उन्होंने ज़ोर दिया कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है जब नीतियाँ जन-आधारित और अधिकार-केंद्रित हों। राष्ट्रीय जनता दल (महिला प्रकोष्ठ) की प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल ने कहा कि विकास की धारा जन-केंद्रित और अधिकार-आधारित होनी चाहिए। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने ज़मीनी स्तर से नीति निर्माण की प्रक्रिया को ऊपर तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता निहोरा प्रसाद यादव ने बीते दो दशकों में बिहार में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा, सड़क निर्माण, बिजली सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसे क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले पाँच वर्षों में औद्योगिक प्रगति को प्राथमिकता दी जाएगी। कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉ. मधुबाला ने आपदा जोखिम प्रबंधन में सरकार की विफलता पर चिंता व्यक्त की और इस दिशा में ठोस नीति की ज़रूरत बताई। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और पलायन को पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने की बात कही। वहीं, अखिलेश कुमार ने राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की कमी पर चिंता प्रकट की और आंतरिक लोकतंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। विमर्श में शामिल वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार ने बिहार में मूलभूत सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि विकास की चर्चा में शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, आवास और रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दे प्रमुखता से शामिल होने चाहिए। कार्यक्रम में आरटीई फ़ोरम के डॉ. अनिल राय, एक्शन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस के राजीव कुमार, जीपीएसवीएस के डॉ. अजय कुमार झा, सहोदय संस्था के अनिल कुमार, वीमेनलाइन की डॉ. मीनाक्षी स्वराज, एमिटी यूनिवर्सिटी पटना की डॉ. संज्ञा पांडेय और प्रो. अरुण कुमार सिंह समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए।

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