सामुदायिक विरोध के बीच बाल विवाह रोकने की चुनौती!!

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समस्तीपुर।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, महिला एवं बाल विकास निगम, चाइल्ड हेल्प लाइन और दलसिंहसराय थाना के संयुक्त पहल से बालिका वधू बनने से बचाई गई‌। विदित हो कि दलसिंहसराय थाना के खोकसा गाँव में बाल विवाह की घटना संज्ञान में आते हीं जिला की सभी बाल सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो गया। मालूम हो कि जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र समस्तीपुर जिला को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए दो दशक से व्यापक जागरुकता अभियान चला रही है। संस्था बच्चों के सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। संस्था जिला प्रशासन, चाइल्ड हेल्प लाइन, महिला एवं बाल विकास निगम तथा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित हस्तक्षेप करती है।
इसी क्रम में संस्था को सूचना प्राप्त हुई कि दलसिंहसराय प्रखंड के खोकसा गाँव में एक नाबालिग लड़की का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते हीं चाइल्ड हेल्प लाइन, महिला एवं बाल विकास निगम, समस्तीपुर, स्थानीय पुलिस तथा जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र की संयुक्त टीम गाँव पहुँची।

मौके पर पहुँचने पर टीम ने पाया कि विवाह की सभी तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी थीं। टीम ने सूचना के आधार पर संबंधित लड़की से मिलकर उसकी आयु की पुष्टि करने एवं आवश्यक दस्तावेज़ देखने का प्रयास किया, लेकिन परिवार ने उसे सामने नहीं आने दिया। इसके बजाय परिजनों ने दूसरी लड़की को प्रस्तुत किया और उसी के दस्तावेज़ दिखाने का प्रयास किया। आशंका थी कि जिस लड़की के बाल विवाह की सूचना मिली थी, उसकी वास्तविक आयु कम होने के कारण उसे जानबूझ कर घर से अलग कर दिया गया था ताकि उसकी पहचान और आयु की पुष्टि न हो सके।

पूरे घटनाक्रम के दौरान परिवार एवं स्थानीय लोगों द्वारा भ्रामक और विरोधाभासी बातें कही जाती रहीं। कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और भविष्य में विवाह कराने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पाएगा, इसलिए अभी विवाह करना उनकी मजबूरी है। वहीं कुछ लोग लगातार यह कहते रहे कि लड़की बालिग है और किसी प्रकार का बाल विवाह नहीं हो रहा है। इन विरोधाभासी दावों और संबंधित लड़की को सामने नहीं आने देने के कारण बाल विवाह की आशंका और अधिक प्रबल हो गई।

इसी दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए और हस्तक्षेप का विरोध करने लगे। कुछ लोगों ने टीम के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा सरकारी वाहन को चारों ओर से घेर लिया। माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भीड़ का रवैया असहयोगपूर्ण रहा, जिससे टीम की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।
टीम की प्रतिक्रिया:
टीम ने धैर्य और संयम के साथ ग्रामीणों एवं परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के कानूनी प्रावधानों तथा बाल विवाह के सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया। स्थिति को शांत करने के लिए लगातार संवाद किया गया, लेकिन भीड़ सहयोग के लिए तैयार नहीं हुई। बढ़ते तनाव को देखते हुए टीम ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए घटनास्थल से वापस लौटने का निर्णय लिया तथा मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई।

सीखी गई बातें:
बाल विवाह रोकने में सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक स्वीकृति और सामुदायिक प्रतिरोध है।
केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; समुदाय आधारित निरंतर जागरूकता आवश्यक है।
पंचायत प्रतिनिधियों, आशा, आंगनवाड़ी सेविकाओं, जीविका समूहों, विद्यालयों और स्थानीय युवाओं को पहले से जोड़ना हस्तक्षेप को अधिक प्रभावी बना सकता है।
संवेदनशील मामलों में पुलिस, प्रशासन और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
आगे की रणनीति
बाल विवाह संभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी।
ग्राम स्तर पर किशोरी एवं अभिभावक जागरूकता बैठकों का आयोजन।
पंचायत एवं वार्ड स्तर पर बाल कल्याण और संरक्षण समितियों को सक्रिय करना।
सूचना तंत्र को मजबूत करना।
स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक नेताओं को बाल विवाह रोकथाम अभियान से जोड़ना।
अलगे दिन कार्यकर्ताओं के द्वारा जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से मिलकर इसकी सूचना दी गई।

निष्कर्ष:

यह घटना दर्शाती है कि बाल विवाह उन्मूलन केवल कानून लागू करने का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक सोच परिवर्तन की लंबी प्रक्रिया है। यद्यपि इस हस्तक्षेप के दौरान तत्काल सफलता नहीं मिल सकी, फिर भी इस अनुभव ने संस्था को समुदाय आधारित रणनीतियों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सीख दी। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, समस्तीपुर भविष्य में भी प्रशासन एवं समुदाय के सहयोग से प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

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