गरीबों को वोट देने से रोकने की साजिश रची जा रही है.. विधायक शाहीन

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बिहार में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराये जाने के फैसले पर घमासान मचा हुआ है। राजद ने इसका पुरजोर विरोध किया है, और इसे गरीबों को वोट देने से रोकने की साजिश बताया है। समस्तीपुर के स्थानीय विधायक सह बिहार विधान सभा के मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने कहा है कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद से ही मतदाता सूची को लेकर सवाल उठ रहे हैं और अब तक चुनाव आयोग की ओर से इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। अब अगर चुनाव आयोग बिहार में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मतदाता सूची में संशोधन के नियमों में कुछ बदलाव करता है तो उसे पहले जनता और सभी हितधारकों को विश्वास में लेना चाहिए। राजद विधायक ने सवाल उठाते हुए पूछा कि पिछली बार जो काम 2 साल में हुआ था, इस बार इसे 25 दिन में कैसे पूरा किया जायेगा। क्यों नहीं केंद्र सरकार 25 दिनों में जातीय जनगणना करा लेती है। गरीबों को वोट देने से रोकने की साजिश रची जा रही है। कहा कि चुनाव आयोग वोटरबंदी कर रही है। चुनाव आयोग को जनता को भरोसा दिलाना होगा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष है और इसमें कोई गलती नहीं की जाएगी। क्योंकि महाराष्ट्र चुनाव के बाद चुनाव आयोग की कार्यशैली पर जो सवाल उठे हैं, उससे लोगों के मन में यह संदेह या डर पैदा होना स्वाभाविक है। लोगों को शक है, और इस बात का डर है कि भाजपा के लोग और सत्ता में बैठे लोगों के दबाव में कहीं चुनाव आयोग उन लोगों का नाम मतदाता सूची से न हटा दें, जो भाजपा के समर्थक नहीं माने जाते। इसलिए चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया क्या है, इसके मापदंड क्या हैं? और किस आधार पर किसी का नाम हटाया या जोड़ा जाएगा।

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