समस्तीपुर : उत्तर बिहार का 1 मात्र बोड़ा उत्पादन कामिल रामेश्वर जूट मिल मुक्तापुर तीन पाली के बदले मात्र दो पाली में चल रही है। मिल में काम करने वाले मजदूर के परिवारों का भरण पोषण मिल में काम करने से हो रहा है। मिल उत्पादन क्षमता शुरू में 50 टंन थी वर्तमान समय में मात्र दो पाली में चलने के को लेकर 22 टन बताई गई है। मिल की कर्मियों की माने तो इसका एकमात्र कारण मिल में आग लगने को लेकर बड़े-बड़े लूंम स्प्रिंग मशीन जल चुके थे। प्रबंधन द्वारा290 लूम लगवाया गया। और 150 s4 मशीन लगाने की तैयारी चल रही है। पूर्व में मिल की मजदूरों की संख्या लगभग 4000 हुआ करती थी। कई बार मिल बंदी को लेकर मजदूरों की क्षमता 3200 गई। सबसे बड़ी अचानक तालाबंदी 6 जुलाई 2017 को अचानक हो गई काफी मकसद के बाद 15 सितंबर 2020 को मिल खुली। दूसरी बंदी 25 अप्रैल 2023 पुनः 14 जून 2023 को मिल खुली। बंदी को लेकर यहां के कार्यरत मजदूर कटिहार कोलकाता दूसरे दूसरे मिल में काम करने लगे। वर्षों बाद
जब यहां मिल खुला तब धीरे-धीरे मजदूरों का पलायन बंद हुआ। तीन पाली में मिल चलती थी तो 12 सौ से 14 सौ मजदूरों को प्रतिदिन रोजगार मिलता था। उत्पादन क्षमता में भी काफी वृद्धि हो रही थी। प्रबंधन के अनुसार 32 टन तक उत्पादन चला गया था। ऐसे चलता रहता व आवश्यकता अनुसार लूम मिल प्रबंधन द्वारा लगा दिया जाता तो लक्ष्य को छू लेता। मिल प्रबंधन को गाइड लाइन कोलकाता के विल्सन इंटरनेशनल द्वारा कियाजाता है। बीच में लंबे समय तक मिल में कमर्शियल मैनेजर का अभाव था। रिक्त पद पर कमर्शियल मैनेजर के पद पर राजस्थान के अभिषेक शर्मा योगदान दे चुके हैं। प्रधान सहायक व लेखा की जिम्मेदारी अजय कुमार सिंह देख रहे हैं। मिल के निदेशक के पद पीके पांडे कार्यरत हैं उनके योगदान देने के बाद शांतिपूर्ण माहौल में बोड़े का उत्पादन हो रहा है यहां का बोड़ा पंजाब हरियाणा बिहार उत्तर प्रदेश राज्यों में मांग के अनुरूप भेजी जाती है यहां के पटसन से उत्पादित बोड़े की क्वालिटी अनोखी है। बाजार में इसकी मांग ज्यादा है। पटसन की आपूर्ति कटिहार पूर्णिया असम कोलकाता से मंगवाई जाती है। क्या कहते हैं निर्देशक यदि विद्युत की व्यवस्था सुदृढ़ हो जाए तो उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होगी। तीन पाली में मिल चलाने को लेकर मजदूरों को सूचना दी जा रही है इन दोनों लगन पूर्व में गेहूं कटनी आदि को लेकर मजदूर की संख्या कम हो गई थी। धीरे-धीरे बढ़ रही है। विडंबना एक बात की है कि 15 सितंबर 2020 को जब मिल लगभग 3 वर्ष खुला तो उसे समय बिहार सरकार के उद्योग मंत्री ने मिल प्रबंधन को आश्वासन दिया था कि मिलकर बंदी के समय के विद्युत बकाया जो लगभग 55 लाख थी उसमें सरकार से माफ कराया जाएगा साथ 10 करोड़ सब्सिडी देने का आश्वासन बिहार सरकार के तत्कालीन उद्योग मंत्री ने दिया था। वह अब तक नहीं मिली। साथी विद्युत विभाग के यहां मिल के 74 लाख सिक्योरिटी मनी जो जमा थी उसी में से बकाया 55 लाख काट लिया गया। पुनः विद्युत विभाग मिल से पूरा सिक्योरिटी मनी पूरा करने की मांग कर रही है। इसको लेकर मिल की आर्थिक स्थिति लचर हो गई थी। अब तक कोई विद्युत माफी व सब्सिडी का लाभ सरकार के द्वारा नहीं मिला।
























































