चौथे स्तम्भ के कलमवीरों की प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं बल्कि अपनी खुद का पहचान जगत की जमीं पर बनाता है – संजय भारती

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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिला अन्तर्गत हसनपुर विधानसभा के पत्रकार संजय भारती ने बताया कि चौथे स्तंभ के कलमवीरों की प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं बल्कि अपनी खुद का पहचान जगत की जमीं पर बनाता है। उन्होंने बताया अपना भाई हो या कोई रिश्तेदार, या हो जन्म देने वाले माता-पिता, कोई धन दौलत बांट लेता है, उस कलमवीरों मानव के अंदर की प्रतिभा को कोई नहीं चुरा पता है, और नहीं कोई बांट पाता है, जब प्रतिभा अपनी रूप दिखलाता है तो जग के मानव का मन खिल जाता है, इसीलिए प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती,जग में ऐसा कहलाता है।जग के हर मानव अपने मन के अनुरूप एक मंजिल पथ का करता है चुनाव, उस मंजिल को पाने के लिए उस पथ पर बढ़ाता है अपना पांव, किसी को कुछ दूर चलने पर ही मिल जाती है मंजिल, कोई कोसो दूर लगाता है दौर, फिर भी नहीं मिल पाता उन्हें मंजिल का ठौर, कोई अपने जीवन का मंजिल सजाता विधायिका बन, जग के मानव जीवन की रक्षा करना, उनका विकास, समाज का विकास,राज्य का विकास, देश का विकास, कर जाने का, कोई अपने मन में सपना सजाता कार्यपालिका में आकर अधिकारी के कुर्सी पर बैठकर अपनी हुकुमत चलाने का, कोई मन में सपना सजाता न्यायपालिका की कुर्सी पर बैठकर न्याय सुनाने का, कोई मानव मन में सपना सजाता इन तीनों संस्थाओं के कुर्सियों पर बैठे हुए मानव के द्वारा किए जा रहे मानव कल्याण के कार्यों को जन जन तक पहुंचाने का, जिसे हम चौथा स्तंभ कहते हैं पत्रकारिता क्षेत्र के नाम से जग में जाने जाते हैं, लेकिन इन तीनों संस्थानों से बड़ा अधिकार चौथा स्तंभ को दिया है। देश का नागरिक और कलम के सिपाही कलमवीर जब तक जगे हुए रहते हैं तब तक भ्रष्टाचारी साहस नहीं कर पाते हैं भ्रष्ट विचारधारा अपनाकर देश की धन लूट पाने का, कलम वीरों की कलम में कितनी बड़ी ताकत भरी हुई है, उसे याद कर कोई हिम्मत नहीं कर पाता जग के जनमानस की हक हड़प जाने का, भूल बस ऐसा कोई कर बैठता है, कलमवीर अपनी कलम की प्रतिभा को दर्शाकर उनके कारगुजारियों का संदेश जन-जन तक पहुंचाता है, यह है कलमवीरों की कलम की ताकत, जो ऐसे भ्रष्टाचारियों को देश के बने हुए कानून के तहत उनके दोनों हाथों में कानून के हथकड़िया पहनवाकर, न्याय की कुर्सी पर बैठे हुए न्यायधीश महोदय से सजा दिलवा जाता है, वही देश का है पत्रकारिता क्षेत्र, जो चौथा स्तंभ देश में कहलाता है। श्री संजय भारती ने बताया कि आज हमारे देश की जमीं पर भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध, अत्याचारियों के विरुद्ध, बलात्कारियों के विरुद्ध, हत्यारों के विरुद्ध, असहाय निर्धन परिवारों को सताने वाले, रुलाने वाले, तड़पाने वाले, धन की लालच में किसी की बेटी की जीवन मिटाने वाले, दहेज की लालच में आकर अपनी बहू की जान मिटाने वाले, ऐसे कुकर्मियों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले कलमवीरों ने अपनी कलम की स्याही से इनके कारगुजारियों की संदेश जन-जन तक पहुंचाकर, जेल की सलाखों में पहुंचाकर, अपनी कलम की प्रतिभा को दर्शाकर, देश के बीच अपनी चौथा स्तंभ पत्रकारिता क्षेत्र का तिरंगा लहराया है, इस क्रम में कितने कलमवीर शहीद हुए हैं, फिर भी सता की कुर्सी पर बैठे हुए सरकार और ऊंचे अधिकारी इनकी त्याग और बलिदान की ओर अपनी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया है। विधायिका की कुर्सी पर बैठकर, कार्यपालिका के अंदर कार्य कर रहे अधिकारियों पर अपनी हुकूमत चलाकर, देश की जनता की गाढ़ी कमाई अपनी सुख सुविधा पर, अपनी जान की रक्षा पर, अपने भ्रमण आदि मद् में खर्च करने की नियम बनाकर लूटा रहे हैं,अधिकारी इनसे पीछे क्यों रहें, उनके बनाए हुए नियम के तहत अपनी आलीशान सुख सुविधा को ध्यान में रखकर, धन उगाही करने का एक नया तरकीब लाया है, इन सबों के लिए देश की खजाने में धन है, किंतु चौथे स्तंभ के सिपाहियों के लिए इनके पास ना कोई योजना है, ना ही इनके पास कलमवीरों को दो रोटी की सुविधा देने का नियम बनाने का साहस है, यह नहीं सोच पाते हैं कलमवीर कैसे किस परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी कलम को चलाते हैं, कैसी कैसी परिस्थितियों को झेलकर देश की खबर आप तक पहुंचाते हैं, प्रातः नमन आपके चरणों में करते हुए हे विधायिका की कुर्सी पर बैठने वाले, हे कार्यपालिका की कुर्सी पर बैठने वाले, हे न्याय की कुर्सी पर बैठकर न्याय देने वाले अधिकारी महोदय, बस आपसे दो शब्द कहना है, उठाईए अपनी अपनी कलम को, चौथे स्तंभ को जिसको आपने पत्रकारिता क्षेत्र की उपाधि दिया है, उस क्षेत्र में काम करने वाले कलमवीरों के जीवन की रक्षा के लिए, उनके परिजन की पालन पोषण के लिए, उनके द्वारा खबर का संकलन करने की सुविधा के लिए, देश में अटूट एक कानून बनाइए, आज आप सबों की ध्यान कलमवीरों की जीवन हित में केंद्रित करने के लिए, कलमवीरों की परेशानियों को दर्शाया है। भरोसा है विधायिका कार्यपालिका न्यायपालिका के सिपाहियों पर, कलम वीरों की परेशानियों को, बखूबी समझने की वह प्रयास करेंगे, कलमवीरों की जीवन हित में कलम चला कर उनके जीवन और प्राणों की रक्षा के लिए एक दिन जरूर नियम बनाएंगे। हम जग की जमी पर रहे या ना रहें, हमने जो अपनी आवाज को, कुछ पल पहले अपने कलमवीरों की सहयोग से, राज्य के हर जिलाधीश महोदय के माध्यम से, सरकार तक पहुंचाया है, वह एक दिन जरुर रंग लाएगी, कलमवीरों को मिलेगी वह सभी सुख सुविधा, कलमवीरों की जीवन से भूखे रहकर कलम चलाने की नौबत भी मिट जाएगी, वह दिन दूर नहीं है, और वह पल भी दूर नहीं है,सरकार करेगी एक दिन कलमवीरों के लिए बनाए गए नियम की घोषणा, उस दिन चौथे स्तंभ पत्रकारिता क्षेत्र के कलमवीरों की कलम की प्रतिभा अपनी जीत की खुशियां देश में मनाएंगे।

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