बिहार के सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था की लुटिया डुबोते सरकारी अफ़सर__डॉ मिथिलेश कुमार

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अमरदीप नारायण प्रसाद

समस्तीपुर :-बिहार के माननीय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के आदेश पर राज्य के सरकारी विद्यालयों का निरंतर निरीक्ष्ण/अनुश्रवन राज्य के वरिय पदाधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है,जो राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा सराहनीय प्रयास कहा जा सकता है। निरीक्षण / अनुश्रवण के दौरान यह देखा जा रहा है कि वरिए पदाधिकारी प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोगों को साथ में ले जाकर शिक्षकों से अनाप-शनाप प्रश्न पूछ रहे हैं और उसका वीडियो/ ऑडियो वायरल किया जा रहा जो बिल्कुल अनुचित और शिक्षक पद को अपमानित करने वाला कदम है। शिक्षकों की पढ़ाई में अथवा शिक्षा व्यवस्था में यदि कुछ कमी दिखती है तो पुरानी परिपाटी और शिक्षा विभाग के निदेश के आलोक में वरीय पदाधिकारियों को शिक्षकों/ प्रधानाध्यापकों को बच्चों से अलग होकर शिक्षा में सुधार हेतु आवश्यक सुझाव देना है।न कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के सामने शिक्षकों से प्रश्न पूछना और उसका रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वायरल करना । अधिकारियों के इस कदम से समाज में शिक्षकों का मान सम्मान और प्रतिष्ठा गिर रहा है ।आज राज्य और देश की आम जनता को ऐसा अनुभव हो रहा है कि राज्य में शायद अधिकांश शिक्षक अयोग्य ही हैं? यदि एक बार राज्य के जनता जनार्दन के मन में यह भ्रम बैठ गया कि शिक्षक अयोग्य हैं तो चाहे कितना भी योग्य शिक्षक हों वे बच्चे को पढ़ा नहीं सकते है। यह भी देखा जा रहा है कि यदि शिक्षक धोती- कुर्ता अथवा पैजामा-कुर्ता में रहते है तो उन् पर जिला पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई की जा रही है जो बिल्कुल नियम विरुद्ध भी है। शिक्षकों के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं है ऐसी स्थिति में यदि शिक्षक परम्परागत पोशाक धोती- कुर्ता/ पैजामा-कुर्ता पहन कर आते हैं तो उन पर कार्रवाई नहीं किया जा सकता है।इसलिए राज्य के शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अखबार के माध्यम से मैं राज्य के पदाधिकारियों से अपील करना चाहता हूं कि वे शिक्षकों को अपमानित करना छोड़ कर यदि उनमें (शिक्षकों में) कोई कमी है तो वह सुझाव दें न कि शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने का कार्य करे?

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