बिहारशरीफ:-बिहारशरीफ के अंबेडकर चौक पचास मोड पर डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के तत्वाधान में शौर्य विजय दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम भीमा-कोरेगांव युद्ध में महार शहीदों की याद में पुष्पांजलि कर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पासवान प्रदेश अध्यक्ष रामदेव चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा कि जहां पूरी दुनिया नए साल के जश्न में सरोवर रहती है वहीं दूसरी तरफ दलित समाज अपने पूर्वजों के बलिदान को याद करते हुए इस दिन को शौर्य विजय दिवस के रूप में मनाता है। यह दिन दलित समाज के लिए खास इसलिए भी होता है क्योंकि यह दिन उनके लिए ब्राह्मणवादी सोच और सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए सबसे बड़ी लड़ाई में जीत का दिन भी है कहा जाता है कि इस दिन 1 जनवरी 1818 को दलित समाज के सिर्फ 500 महारों समुदाय के सैनिक ने पेशवा के 28000 सैनिकों को हराया था और उन्हें आत्म समर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया था इस दिन को दलित समाज हर वर्ष शौर्य विजय दिवस मानता है और मनाते आ रहा है। पुणे भीमा-कोरेगांव में विजय स्तंभ पर जहां उनके पूर्वजों की वीरता अंकित है इस युद्ध की याद में अंग्रेजों ने 1851 में भीमा-कोरेगांव में एक स्मारक का निर्माण करवाया और इस जगह पर हर साल 1 जनवरी को इस दिन दलित समुदाय के लोग एकत्र होते हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर ने शुरू की समारोह की परंपरा 1 जनवरी 1927 को बाबा साहब इस स्थान आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था, तब से इस स्थान पर दलित समुदाय के लोग जय स्तंभ को देखने आते हैं और अपने पूर्वजों के वीरता को देखकर सौर ऊर्जा लेकर लौटते हैं।
इस मौके पर डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नंदलाल दास प्रधान महासचिव सुरेश कुमार दास जिला उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद महिला प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष लालती देवी जिला सचिव मोहन चौधरी कामता पासवान भोला पासवान उत्तम रविदास बटोरन रविदास नवल रविदास रंजू देवी मोहम्मद चांद आदि लोगों उपस्थित थे।




















































