अमरदीप नारायण प्रसाद
समस्तीपुर। जिले के स्वयं सहायता समूह भवन, परतापुर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा प्रायोजित आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) योजनान्तर्गत अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के आजीविका हेतु 20 दिवसीय जूट के रेशे से हस्तशिल्प : सीखने से लेकर व्यवसाय बनाने तक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के 13वें दिन मानवाधिकार समिति के माननीय अध्यक्ष सह बिहार विधान परिषद के माननीय सदस्य डॉ. तरुण कुमार ने औचक निरीक्षण व अवलोकन किया। उन्होंने समूह की दीदीयों से रु-ब-रु होते हुए उनके द्वारा बनाए गए जूट के रेशे से उत्पाद पेन स्टेंड, फुल, डलिया, तना, सिखा, वाल हैंगिंग आदि के बारे में जानकारी लेते हुए नाबार्ड एवं औसेफा के इस रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम कि सराहना की। उन्होंने कहा कि जूट के रेशे से बनाए गए उत्पाद पर्यावरण अनुकूल है। नाबार्ड एवं औसेफा के इस पहल से माननीय प्रधानमंत्री जी के लोकल फाॅर वोकल का सपना साकार हो रहा है। माननीय एमएलसी डॉ. कुमार ने कहा कि जूट के हस्तशिल्प उत्पादों से महिलाओं में रोजगार सृजन के साथ-साथ आत्मनिर्भरता आयेगी तथा पारंपरिक कला को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने नाबार्ड के सौजन्य से जिले के चीनी मील चौक पर स्थापित मिथिला ग्राम नाबार्ड रुरल मार्ट का भी अवलोकन किया। जहां ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए मिथिला पेंटिंग उत्पाद को देख कर सराहना की। इस अवसर पर डीडीएम नाबार्ड अभिनव कृष्ण ने बताया कि नाबार्ड के राष्ट्रीय स्तर के मेले में महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद अन्य राज्यों भोपाल एवं चंडीगढ़ में अक्टूबर एवं नवम्बर माह में कलाकारों को भाग लेने हेतु भेजा जा रहा है। मौके पर औसेफा के सचिव ललित कुमार, कलाकार प्रेरणा कुमारी, प्रशिक्षक धर्मेंद्र राम, शिवनाथ महतो सहित तीस प्रशिक्षणार्थी मौजूद थी।
























































