हिंदी और मैथिली के मूर्धन्य साहित्यकार राम पुनीत ठाकुर ‘ तरुण ‘ इस दुनिया को छोड़ परलोक सिधार गए।

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समस्तीपुर :
हिन्दी और मैथिली के मूर्द्धन्य साहित्यकार और हिन्दी साहित्य सम्मेलन की समस्तीपुर जिला इकाई के अध्यक्ष रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण ‘ नहीं रहे। सोमवार की देर रात उनका निधन समस्तीपुर स्थित उनके निजी आवास पर हो गया। वे 76 वर्ष के थे तथा विगत कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। मंगलवार को उनका दाह संस्कार समस्तीपुर की बूढ़ी गंडक नदी के किनारे कर दिया गया। वे अपने पीछे अपने दो पुत्रों- प्रणव व छोटू तथा दो पुत्रियों- अनामिका और मधुलिका का भरपुरा परिवार छोड़ गये हैं।
तरुण जी हिन्दी और मैथिली साहित्य के शीर्षस्थ साहित्यकार थे। हिंदी में- सुनो शिखर पुरुषो, आग अंबर में लगेगी, वेदना का उपहार, श्री दुर्गा चरित और मैथिली में गीत पचीसी समेत एक दर्जन से अधिक उनकी काव्य-पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनके निधन से समस्तीपुर के साहित्यिक समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। उनके निधन की खबर सुनकर वरिष्ठ साहित्यकार हरिनारायण सिंह हरि, परमानंद प्रभाकर, डाॅ अशोक कुमार सिन्हा, नरेन्द्र कुमार सिंह, पंकजदेव आदि उनके निवास स्थान पर पहुँच कर उनके शव पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए शोक प्रकट किया । शिवेंद्र पाण्डेय, नरेश विकल, प्रवीण कुमार चुन्नू , विष्णु कुमार केडिया, मुकेश केशरी, मो जावेद, डा रामसूरत दास, प्रो जितेंद्र कुमार सिंह, धनेश्वर शर्मा, सत्येंद्र ठाकुर आदि साहित्यकारों ने भी उनके निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि निवेदित की है

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