प्रदीप कुमार नायक
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
सनातनी हिन्दू विरोधी कानून – जिन पर जागरुक पढ़ें लिखे सभी सनातनी हिन्दू लोग बराबर सवाल उठाते हैं l
संविधान के अनुच्छेद 14 में लिखा है: सबको कानून के सामने बराबरी का हक मिलेगा। फिर भी कुछ कानून ऐसे हैं जिन पर बहस होती है। तथ्य पढ़िये और खुद फैसला कीजिये l
1. अनुच्छेद 370 – साल 1949, 1954–
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था। अपना अलग संविधान, अपना अलग झंडा, और भारतीय दंड संहिता की जगह रणबीर दंड संहिता चलती थी।
5 अगस्त 2019 को संसद ने इसको हटा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में हटाने को सही ठहराया।
2. अनुच्छेद 35ए – साल 1954, राष्ट्रपति के आदेश से–
जम्मू-कश्मीर सरकार को अधिकार था कि वो तय करे कि स्थायी निवासी कौन है। जो स्थायी निवासी नहीं था वो वहाँ जमीन नहीं खरीद सकता था, सरकारी नौकरी नहीं कर सकता था।
सोचो सनातनी हिन्दू विरोधी कानून कांग्रेस ने ही लागू किया था पाकिस्तानी के नागरिकों को भारत के कश्मीरी लड़की से शादी करने पर नागरिकता देने वाला काला कानून था l –
सन 1954 के नियम के तहत अगर कोई कश्मीरी औरत पाकिस्तान के आदमी से शादी करती थी तो उसके पति को जम्मू-कश्मीर की स्थायी नागरिकता मिल जाती थी। लेकिन अगर कोई कश्मीरी औरत भारत के किसी दूसरे राज्य के आदमी से शादी करती थी तो उस औरत की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी। भारत के दूसरे राज्यों के लोगों को किसी भी हालत में जम्मू-कश्मीर की नागरिकता नहीं मिल सकती थी।
सन 2019 में अनुच्छेद 370 के साथ ये नियम भी अपने आप खत्म हो गया।
3. हिन्दू कोड बिल – साल 1955-56–
हिन्दुओं के लिए शादी, तलाक, जायदाद, गोद लेना, संरक्षकता के कानून संसद ने बनाए। मुस्लिम, ईसाई, पारसी के लिए उनके अपने अलग धर्म आधारित कानून चलते रहे। 1985 में शाह बानो मुकदमे के बाद पूरे देश में एक समान नागरिक संहिता की मांग तेज हुई।
4. हिन्दू धार्मिक बंदोबस्ती कानून – साल 1951 से, हर राज्य में अलग
जवाहर लाल नेहरू की कांग्रेस ने सन् 1951 में संविधान में कानून बनाकर बड़े-बड़े मंदिर सरकार के अधीन कर दिए गए। सिर्फ तमिलनाडु में 36 हजार से ज्यादा मंदिर हिन्दू धार्मिक व धर्मार्थ विभाग के पास हैं।
मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभस्वामी मंदिर को वापस त्रावणकोर राजघराने को सौंप दिया।
5. वक्फ कानून – साल 1995, 2013 में बदलाव
वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी माना जाता है, उसके खिलाफ सिविल कोर्ट में नहीं जा सकते। 2013 के बदलाव में वक्फ की जमीन पर समय सीमा का कानून हटा दिया गया।
सन 2024 में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार नया संशोधन बिल लाई और जरूरी बदलाव किए गए।
6. पूजा स्थल कानून – साल 1991–
15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक जगह जिस धर्म की थी, उसी की रहेगी। अयोध्या को इसमें छूट दी गई थी।
इस कानून की वजह से काशी और मथुरा आदि के मुकदमों पर रोक लगी है, फिलहाल इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है इसलिए सुनवाई कुछ मामले को लेकर चल रही है।
7. अनुच्छेद 30 – साल 1950–
अल्पसंख्यक समुदाय को अपने स्कूल-कॉलेज बनाने और चलाने का अधिकार दिया गया।
बहुसंख्यक समुदाय के संस्थानों को ये खास अधिकार नहीं मिले।
8. शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 12(1)(ग) – साल 2009
निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाना जरूरी है।
सन 2014 में प्रमति फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों पर ये नियम लागू नहीं होगा।
9. हिन्दू पर्सनल लॉ बोर्ड क्यों नहीं है–
भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड साल 1973 में बना। ये एक निजी संस्था है, कोई सरकारी कानून नहीं। सिख, ईसाई के भी अपने धर्म आधारित कानून हैं पर उनका कोई बोर्ड नहीं। हिन्दुओं के लिए साल 1955-56 में संसद ने खुद हिन्दू कोड बिल पास करके कानून बना दिया, इसलिए अलग बोर्ड की जरूरत नहीं पड़ी।
हम सभी सनातनी हिन्दू लोगों की मांग है—–
1-सभी धर्मों के लिए धार्मिक शिक्षा हेतु कानून एक समान होने चाहिये और सभी धर्मों के धार्मिक स्थान और सभी संस्थानों के लिए एक जैसा कानून होना चाहिये।
2- संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता पर देश में खुलकर चर्चा होनी चाहिये।
3- हर भारतीय नागरिक को कश्मीर से कन्याकुमारी तक जमीन खरीदने और नौकरी करने का बराबर अधिकार मिलना चाहिये।




















































