अमरदीप नारायण प्रसाद
राज्य के तीन नवगठित विश्वविद्यालयों में शामिल पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में डॉ. घनश्याम राय याद किये जायेंगे। पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद से विरमित होने के बाद डॉ. घनश्याम राय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर योगदान कर चुके हैं। दरअसल, पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह के समय जितने कोर्स और कार्य शुरू कराये गये थे, उसमें से किसी का भी अनुमोदन सरकार के स्तर पर विधिवत प्राप्त नहीं था। डॉ. राय ने जब कुलसचिव की कुर्सी संभाली, तो तमाम पत्र निर्गत हुए उनके द्वारा एमबीए मान्यता पत्र, स्नातकोत्तर विषयों की मान्यता और पद सृजन, अररिया कालेज और मारवाड़ी कालेज में स्नातकोत्तर विषयों में मान्यता मिली।
बीएनमंडल विश्वविद्यालय से अनुकंपा पर नियुक्त 21 पाल्यों का सरकार से वर्षों तक लंबित वेतन भुगतान पत्र तथा नये अनुकंपा पाल्यों के लंबे संघर्षों के बाद 16 पाल्यों की नियुक्ति की अधिसूचना हुई। वेतन पेंशन के मामले ससमय हुए, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की छात्राओं को सरकार के स्तर पर बंचित तमाम सुविधाओं को उपलब्ध करायी गयीं। संबद्ध महाविद्यालयों के समस्याओं के निदान हेतु सरकार से पत्र निर्गत कराये गये। कुलपति को देय पेंशन की राशि को (लगभग एक लाख रुपये) सैलरी से अक्टूबर, 2022 से कटौती करा कर भुगतान सुनिश्चित कराया गया। रिकवरी के लिए सरकार को पत्र का जवाब दिया गया, जो अद्यतन अप्राप्त रहा।
डॉ. राय को इस बात का मलाल है कि कुलसचिव के रूप में चतुर्थ वर्गीय श्रेणी के कर्मचारियों का प्रमोशन हेतु सरकार से पत्र निर्गत नहीं करा पाया । हालांकि, वह जो प्रक्रियाधीन है। संबद्ध महाविद्यालयों में विवाद और संतुष्ट नहीं रहने के कारण दानदाताओं की सूची का भारी दबाव के बावजूद अधिसूचना जारी नहीं किया ।
डॉ. राय का मानना था कि चूंकि बी एन मंडल विश्वविद्यालय के समय की सूची को तोड़-मरोड़कर अधिसूचित करने से अच्छा है, पैतृक विश्वविद्यालय को वापस कर दे कि वही अधिसूचना जारी करे, अन्यथा पूर्णियां विश्वविद्यालय अपने स्तर से दानदाताओं हेतु विज्ञापन प्रकाशित करने के बाद अधिसूचना जारी करे। नये दानदाताओं को भी मौका मिलना चाहिए। आपको याद दिला दूं कि कुलाधिपति के आदेश पर डॉ. राय को 21 मार्च को कुलसचिव के पद से विरमित किया गया ।






















































