आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण में 10% सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षुओं का चयन करें, ताकि उनके माध्यम से अन्य छात्रों को भी प्रशिक्षित किया जा सके- कुलपति
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के तत्वावधान में “आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन” विषय पर 8 से 14 अगस्त, 2026 के बीच सात दिवसीय आवासीय “युवा आपदा मित्र” प्रशिक्षण कार्यक्रम का जुबिली हॉल में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर वित्तीय परामर्श इन्द्र कुमार, कुलानुशासक प्रो विजय कुमार यादव, डीएसडब्ल्यू एवं प्रभारी कुलसचिव प्रो अशोक कुमार मेहता, एसडीआरएफ, पटना से हवलदार कृष्ण नंदन सिंह, कार्यक्रम समन्वयक-प्रथम डॉ आर एन चौरसिया एवं समन्वयक-द्वितीय डॉ शबनम कुमारी आदि ने संबोधित किया। उद्घाटन सत्र का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्र-गीत तथा बिहार-गीत से हुआ, जबकि समापन कुलगीत एवं राष्ट्रगान से हुआ। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो, बुके एवं मिथिला पेंटिंग आदि से किया गया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति ने कहा कि आज का दिन यहां के स्वयंसेवकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपदा प्रशिक्षण प्राप्त करने से छात्रों के जीवन में नया आयाम जोड़ेगा। साथ ही वे प्रोफेशनल बनकर न सिर्फ नौकरी करेंगे, बल्कि आपदा के समय दूसरों की जान बचाने का भी काम करेंगे। वे नौकरी करने से भी बड़ी समाजसेवा का कार्य कर सकेंगे। कुलपति ने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण में 10% सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षुओं का चयन करें, ताकि उनके माध्यम से अन्य छात्रों को भी प्रशिक्षित किया जा सके। ऐसे स्वयंसेवकों को हम अपने समारोहों में बुलाएंगे, सेवा लेंगे तथा पुरस्कृत भी करेंगे। कहा कि अतिथियों का स्वागत करना हमारी परंपरागत संस्कृति है, क्योंकि हम पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। कुलपति ने आयोजकों से कहा कि वे प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को समुचित सुविधा उपलब्ध कराये।
वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार ने इस समाजोपयोगी प्रशिक्षण के लिए बिहार सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए स्वयंसेवकों को बधाई दी। कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को समाज की मुख्य धारा में जोड़ेगा। इससे युवा समाज से सीधे जुड़ेंगे और विपरीत समय में भी सही निर्णय ले सकेंगे। प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन, सरकार एवं समाज की सहायता करने में भी सक्षम होंगे। डीएसडब्ल्यू प्रो अशोक कुमार मेहता ने कहा कि इस शिविर से स्वयंसेवकों के आपदा-कौशल में काफी वृद्धि होगी। एसडीआरएफ की टीम एनएसएस के छात्रों को आपदा संबंधी व्यावहारिक सीख देंगे, जिससे वे रोजगार के योग्य भी हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि एनइपी-2020 में आपदा-प्रबंधन को भी एक प्रमुख पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है।
मुख्य प्रशिक्षक हवलदार कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि बिहार बहु आपदा प्रभावित क्षेत्र है। विशेष कर मिथिला क्षेत्र भूकंप एवं जल प्रलय प्रभावित क्षेत्र है, जहां प्रशिक्षित ‘युवा आपदा मित्र’ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। इस दृष्टि से यहां चार बैचों में 800 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षित होना बड़ी उपलब्धि होगी।
प्रशिक्षण शिविर के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश कराते हुए विस्तार से आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि आपदा के समय एनडीआरएफ या एसडीआरएफ को मौके पर पहुंचने में कुछ घंटों का समय लगता है, परंतु प्रशिक्षित स्वयंसेवक शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ में सबसे पहले बचाव कर्ता के रूप में आधुनिक, वैज्ञानिक एवं संस्थागत दृष्टिकोण से काफी लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि प्रशिक्षण से हमारे एनएसएस के छात्र-छात्राएं सामाजिक परिवर्तनों के वाहक बनेंगे। प्रशिक्षण के बाद इनकी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाएगी।
डॉ शबनम कुमारी ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन करते हुए शिविर के सम्यक संचालन हेतु बनाई गई समिति एवं उप समितियों के संयोजक एवं सदस्यों से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया। समारोह का समापन बिहार-गीत तथा राष्ट्रगान से हुआ। तत्पश्चात तकनीकी सत्र में एसडीआरएफ, पटना की 10 सदस्यीय टीम ने सामुदायिक प्रशिक्षण का स्वरूप एवं उद्देश्य की दृष्टि से बिहार की संवेदनशीलता, बाढ़ पूर्व, बाढ़ के दौरान एवं बाढ़ के बाद सुरक्षा व्यवस्था तथा डूबने से होने वाली घटनाओं से बचाव तथा जीवन रक्षक विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। संध्या काल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
[8/8, 8:21 PM] chandrakanta2008rk: ,





















































