देशरत्न, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी का101वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

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बिहारशरीफ:- बिहारशरीफ के मोहल्ला सहोखर में अतिपिछड़ा/ दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के तत्वाधान में भारत रत्न ,जननायक भूतपूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जी के चित्र पर मल्यापन कर पुष्प अर्पित करते हुए 101वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मंच संचालनकर्ता राजेश ठाकुर भारत रत्न जननायक कपूरी ठाकुर साहित्य परिषद (बिहार)
इस अवसर पर अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदेव चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष सह संस्थापक बलराम साहब ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्पूरी ठाकुर भारत के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार राज्य के दो बार मुख्यमंत्री तथा एक बार दूसरे उपमुख्यमंत्री बने। कपूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल में समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव (जिसे आप कपूरी गांव कहा जाता है) में नई जाति में हुआ था। उनके पिताजी का नाम गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था। इनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा बाल काटने का काम करते थे।
उन्होंने 1940 में मैट्रिक की परीक्षा पटना विश्वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में पास की 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन शुरू गया तो उसमें कूद पड़े परिणाम स्वरूप 26 महीने तक भागलपुर के कैंप जेल-यातना भुगतने के उपरांत 1945 में रिहा हुए।1948 में आचार्य नरेंद्रदेव एवं जयप्रकाश नारायण के समाजवादी दल में प्रादेशिक मंत्री बने। सन 1967 के आम चुनाव में कपूरी ठाकुर के नेतृत्व में संयुक्त समाजवादी दल बड़ी ताकत के रूप में उभरी।1970 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। 1973-77 में वे लोकनायक जयप्रकाश के छात्र आंदोलन से जुड़ गए। 1977 में समस्तीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने। 24 जून 1977 को पुणः मुख्यमंत्री बने। फिर 1980 में मध्यावधि चुनाव हुआ तो कपूर ठाकुर के नेतृत्व में लोक दल बिहार विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरा और कपूरी ठाकुर नेता बने।
कपूरी ठाकुर सदैव दलित शोषित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रार्थनाशील रहे और संघर्ष करते रहे उनका सदा जीवन सरल स्वभाव स्पष्ट विचार और अदम्य इच्छाशक्ति लोगों को प्रभावित कर लेती थी और लोग उनके विराट व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित हो जाते थे। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उसे प्रगति-पथ पर लाने और विकास को गति देने में उनके अपूर्व योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
कपूरी ठाकुर दूरदर्शी होने के साथ-साथ एक ओजस्वी वक्ता भी थे। आजादी के समय पटना की कृष्णा टॉकीज हाल में छात्रों की सभा को संबोधित करते हुए एक क्रांतिकारी भाषण दिया कि “हमारे देश की आबादी इतनी अधिक है कि केवल थूक फेंक देने से अंग्रेज राज बह जाएगा।” इस भाषण के दौरान उन्हें दंड भी झेलनी पड़ी थी।
वह देशवासियों को सदैव अपने अधिकारों को जानने के लिए जागते रहे, वह कहते थे।
“संसद के विशेषाधिकार कायम रहें, अक्षुण रहे, आवश्यकता अनुसार बढ़ते रहें। परंतु जनता के अधिकार भी। यादि जनता के अधिकार कुचले जाएंगे तो जनता आज- न- कल संसद के विशेषाधिकारों को चुनौती देगी।”
कपूरी ठाकुर जी का नारा:-
100 में 90 शोषित है,
शोषितों ने ललकारा है।
धन धरती और राज पाठ में 90 भाग हमारा है।।
अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो, पग- पग पर अडना सीखो
जीना है तो मरना सीखो।
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पिछड़ों को 12% आरक्षण दिया मुंगेरीलाल आयोग के तहत दिए और 1978 में यह आरक्षण दिया था जिसमें 79 जातियां थी इसमें पिछड़ा वर्ग के 12% और अति पिछड़ा वर्ग के 8% दिया था। इनका मृत्यु 17 फरवरी 1988 को पटना बिहार में हो गया। उनके नाम से भारत सरकार ने 1991 में डाक टिकट भी जारी किया। इनको मरणोपरांत उपरांत 2024 में भारत रत्न से केंद्र सरकार ने सम्मानित किया। इस मौके पर उपस्थित सभी ने संकल्प लिए की देशरत्न, जननायक कपूरी ठाकुर जी के बताए हुए रास्ते पर चलेंगे और उनके अधूरे काम को पूरा करेंगे तथा उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएंगे।
इस अवसर पर अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद उद्घाटनकर्ता माननीय श्री ओम प्रकाश शर्मा (शिक्षक) संरक्षक भारत रत्न जननायक कपूरी ठाकुर साहित्य परिषद माननीय श्री महेंद्र कुमार विकल सचिव जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन नालंदा शंकर दास बसपा जिला अध्यक्ष विनोद ठाकुर जिला अध्यक्ष नालंदा स्वागत समिति के सदस्य गण अजय शर्मा नवल पासवान देवानंद ठाकुर उपेंद्र शर्मा धर्मेंद्र कुमार शर्मा राजकिशोर साहब विजय शर्मा सुशील शर्मा उमेश शर्मा संजय शर्मा मुन्ना शर्मा बबलू शर्मा रंजीत कुमार राकेश शर्मा राकेश ठाकुर विजय कुमार शर्मा सुशील शर्मा श्रवण कुमार सुरेंद्र प्रसाद शर्मा महंत भागीरथ साहब महेंद्र प्रसाद बिरजू ठाकुर परमानंद शर्मा राजेश ठाकुर डॉक्टर अवध बिहारी प्रसाद शर्मा शिवू ठाकुर आदि लोग उपस्थित थे।

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