धरना देकर सब्जी व फल उत्पादक किसानों ने फसल क्षति मुआवजे की मांग की

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  • समस्तीपुर, 22 मई ’21
    अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने कहा है कि लॉक डाउन के कारण सब्जी व फल उत्पादक किसान बर्बाद हो गए हैं. हालत यह है कि टमाटर, भिंडी 2 रुपए किलो सहित अन्य साग-सब्जी भी उन्हें कौड़ी के मोल बेचनी पड़ रही है. खीरा, तरबुज, लालमी आदि फल भी कोई खरीदने वाला नहीं है. कर्ज लेकर फसल उगाने वाले किसानों की तो और भी बुरी हालत है. लागत और मुनाफा की बात तो छोड़ ही दें, सब्जी तोड़ने और उसे मंडी तक पहुंचाने की मजदूरी नहीं निकल पा रही है. दूध की कीमत नहीं मिलने से पशुपालक किसान भी परेशान है. सरकार से हम मांग करते हैं कि सभी सब्जी-फल उत्पादक किसानों को फसल क्षति का मुआइना करके तत्काल, फसल क्षति मुआवजा देने, केसीसी समेत अन्य सभी लोन माफ करने, रासायनिक खादों की कीमत घटाने, गेहूँ-मकई खरीद की गारंटी करने की मांग की. वे शनिवार को स्थानीय मोतीपुर वार्ड-10 में सब्जी उत्पादक किसानों के एकदिनी धरना को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे. बासुदेव राय, शंकर सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, संजय शर्मा, मोती लाल सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, अनील कुमार राय, ललन दास, समेत अन्य किसान धरना में शामिल थे.
    उन्होंने आगे कहा कि बिहार सरकार के तमाम दावों के विपरीत गेहूं खरीद की हालत भी बुरी है. सरकारी रेट (1975 रू प्रति क्विंटल) पर कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हो रही है. व्यापारी किसानों को लूटने में लगे हुए हैं. मकई का न्यूनतम समर्थन मूल्य (1850) पर खरीद की घोषणा के बावजूद कहीं क्रय केंद्र नहीं खुला है. सरकार ने इस बार दाल और चना खरीदने की भी घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कहीं आरंभ नहीं हो सका है. निजी व्यापारी छोटा मसूर 7000 रू तो चना 6500 रू प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं, वहीं सरकार ने इसकी कीमत महज 5100 रू प्रति क्विंटल तय की है. ऐसी स्थिति में कोई किसान आखिर क्यों अपना दलहन सरकार को बेचने जायेंगे? जाहिर है कि इसमें सरकारी खरीद प्रणाली को खत्म करने की ही मंशा इसमें झलकती है.
    प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस आशय की जानकारी देते हुए भाकपा माले प्रखण्ड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि यदि किसानों की मांग नहीं मानी जाती है तो लाकडाउन बाद बड़ी गोलबंदी के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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